डिप्टी कमिश्नर ने पराली जलाने से रोकने संबंधी डियूटी में लापरवाही करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती के दिए आदेश

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कपूरथला: कपूरथला जिले में पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिले के 157 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई। पिछले सीजन के दौरान पराली जलाने के कुल मामलों में से 75 फीसदी मामले इन्हीं गांवों से जुड़े थे। इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण और भूमि के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रशासनिक अधिकारी और किसानों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके।

उन्होंने पराली जलाने के मामलों को लेकर अपने कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि डियूटी में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के अलावा वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी विवरण दर्ज किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि वे 24 घंटे के भीतर अग्निशमन स्थलों का दौरा करें और रिपोर्ट जमा करें। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों में पराली जलाने से होने वाले दुष्परिणामों से छात्रों को जागरूक करने का अभियान भी शुरू किया।

डिप्टी कमिश्नर ने यह भी बताया कि जिले में आगजनी के मामलों की निगरानी के लिए 208 नोडल अधिकारी और 39 क्लस्टर अधिकारी तैनात किए गए है। इसके साथ ही किसानों को पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आने का न्योता दिया। बैठक के दौरान अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर जनरल अजय अरोड़ा, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर फगवाड़ा डा. नयन जस्सल, एसडीएम लाल विश्वास बैंस और रणदीप सिंह के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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