Competent Foundation ने जस्टिस Madan Mohan Punchhi की 89वीं जयंती के अवसर पर मैमोरियल लैक्चर किया आयोजित

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चंडीगढ़ : देश के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस मदन मोहन पुंछी की 89वीं जयंती के अवसर पर कोंपिटेंट फाउंडेशन द्वारा तीसरा जस्टिस मदन मोहन पुंछी मैमोरियल लैक्चर आयोजत किया गया। सेक्टर 37 स्थित लॉ भवन में आयोजित इस लैक्चर का विषय ‘टेकनोलोजी के आगमन के साथ कानूनी सुधारों की आवश्यकता’ था जिसमें लीगल बिरादरी के दिग्गजों समेत आमंत्रित जस्टिस ने न्याय व्याव्स्था में तकनीक के अधिक से अधिक का उपयोग करने पर बल दिया। इससे पूर्व कोंपिटेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष संजय टंडन और आयोजन समीति के सदस्य पवन कुमार मुतनेजा ने अपने संबोधनों में आये प्रतिनिधियों को स्वागत करते हुये कहा कि जस्टिस पुंछी देश की कानून प्रणाली के स्तंभ माने जाते रहे है और उन्होंनें अपने कार्यकाल में आदर्श स्थापित किये जो कि वर्तमान में प्रांसगिक है। इस वार्षिक लैक्चर को आयोजित करने का उद्देश्य उन्हें इस अवसर पर याद कर कानून बिरादरी के बीच उनके आदर्शों पर विचार कर कानून व्यवस्था को ओर अधिक मजबूती प्रदान करना है।

आमंत्रित कानून बिरादरी के बुद्धिजीवियों ने जस्टिस पुंछी के साथ बिताये अनुभवों को आये लोगों के समक्ष सांझा किया। सुप्रीम कोर्ट जस्टिस हेंमत गुप्ता ने कानूनी प्रणाली में टेकनोलोजी के इस्तेमाल पर बल देते हुये कहा कि लगभग 75 पूर्व ब्रिटिश राज द्वारा स्थापित की गई ाम्रज्यवादी कानूनी रीतियों को तोड़ने का समय आ गया है और समय के साथ चलकर सिंगापुर जैसी ऑनलाईन कानूनी प्रक्रियाओं को अपनाना चाहिये। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में स्थापित वर्चुअल कांफ्रेस कोर्ट का उदाहरण देते हुये स्पष्ट किया कि टेकनोलोजी के उपयोग से अब दूरियां बाधाये नहीं बनेगी और जल्द न्याय मिलने की एक आस भी जागेगी।

जस्टिस जीएस संधावालिया ने भी अपने संबोधन में टेक्नोलॉजी के माध्यम से कानून सुधार की वकालत की। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोविड 19 के चलते जब दुनिया थम सी गई थी तो न्याय की आस में असंख्य लोगों की कानूनी प्रक्रियाओं में टेक्नोलॉजी हस्तक्षेप ने ही उन्हें राहत प्रदान की। उन्होंने विशेष रूप से बलदेव राज महाजन को बधाइयां व्यक्त की जिन्होंने हरियाणा प्रदेश की कोर्ट में टेक्नोलॉजी को खुला निमंत्रण दिया। साथ ही उन्होंनें 500 मिलियन स्मार्टफोन धारकों को छोड़ बिना 800 मिलियन वंचित स्मार्टफोन धारकों के प्रति भी चिंता जताई जो कि टेकनोलोजी से अंजान हैं।

हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने भी टेक्नोलॉजी के उपयोग को इस प्रोफेशन के लिये सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयास न्यायपालिका को पेपरलेस कोर्ट बनाना है जिससे की समूची केस ऑनलाइन प्रणाली के अधीन हो। उन्होंने बताया कि इस दिशा में प्रयास तेज कर दिये गये हैं उनके एजी ऑफिस के साथ साथ सभी लॉ आफिसों में ऑनलाइन मीटिंग और लैक्चर शुरु किये जा चुके हैं। कस्टडी सर्टिफिकेट्स का डिजिटलीकरण ने व्यापक स्तर पर संसाधनों की बचत हो रही है और अदालतें भी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन का स्वागत करती हैं। यह समूची प्रक्रिया न्यायपालिका में सटीकता और पारदर्शिता लाएगी जो कि सभी के हितों में है। कार्यक्रम की मध्यस्थता एडवोकेट सत्यम टंडन ने की। कार्यक्रम के दौरान बार कौंसिल के अध्यक्ष सुवीर सिद्धू आदि वकीलों ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किये।