अमेरिका को चीन के खिलाफ टैरिफ युद्ध से सबक लेना चाहिए

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“चीन के खिलाफ शुल्क नीति आर्थिक, राजनीतिक और कानूनी रूप से विफल रही है।” अमेरिकी “कैपिटल हिल” ने हाल में एक लेख जारी कर कहा कि चीन के साथ अमेरिकी व्यापार लड़ाई हार गयी है। वास्तव में यह शुरू से ही एक बुरा परिणाम था, विगत चार साल से अधिक समय से साबित किया जा चुका है।

तथ्यों से जाहिर है कि टैरिफ युद्ध, जो चार साल से अधिक समय तक चला है, “अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है” और यह मार बहुत दर्दनाक है, जो हल्का नहीं है। आर्थिक आंकड़े सबसे सहज अभिव्यक्त है। अनुसंधान से पता चलता है कि चीन के साथ अमेरिकी व्यापार युद्ध में टैरिफ लागत का 90% से अधिक अमेरिकी पक्ष द्वारा वहन किया गया है। बीते चार वर्षों में चीन तय गति से विकसित होता रहा है, घरेलू आर्थिक चक्र को प्राथमिकता देकर घरेलू और विदेशी आर्थिक चक्र के एक दूसरे को आगे बढ़ाने के नये विकास ढांचे की रचने का प्रयास किया। अमेरिका के साथ व्यापारिक युद्ध में चीन ने देश की राष्ट्रीय गरिमा और मूल हितों की रक्षा की और दृढ़ता से सुरक्षित विकास के अधिकार को अपने हाथ में पकड़ा है। नूनी पहलू के रूप में अमेरिकी पक्ष की कार्रवाइयों की भी पूछताछ की जाती है। अमेरिका ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत चीन पर ज्यादा शुल्क लगाया। इसने विश्व व्यापार संगठन की बहुपक्षीय नींव को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा इसकी आलोचना की गई है।

निस्संदेह, चीन के खिलाफ टैरिफ युद्ध में अमेरिका को जो सबक मिला, वह बहुत गहरा है। लेकिन सबक कैसे लिया जाए यह वाशिंगटन के राजनेताओं के ज्ञान की परीक्षा लेगा। सबसे पहले, उन्हें यह महसूस करना चाहिए कि आर्थिक सामान्य ज्ञान और बाजार कानूनों के खिलाफ की गयी लापरवाही कार्रवाई अनुचित है। चीन-अमेरिका सहयोग का सार पारस्परिक लाभ है, और प्रशासनिक शक्ति से अर्थव्यवस्था के कानूनों को जबरन बदलने की कोशिश जरूर विफल होगी। दूसरा, तथाकथित “राजनीतिक शुद्धता” के साथ चीन की नीति को गुमराह करने से उसकी अपनी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। यह “चीन के प्रति कठोरता” दिखाने के लिए अतिरिक्त शुल्कों को रद्द करने से बचने के लिए एक गैर-दूरदर्शी राजनीतिक कदम है, जिससे अमेरिका के राष्ट्रीय हितों और लोगों की भलाई को नुकसान पहुंचेगा। इसके अलावा, चीन के खिलाफ चार साल से अधिक के टैरिफ युद्ध ने दिखाया है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बदमाशी एक मृत अंत है। इससे और महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी पक्ष को चीन के विकास को सही तरीके से देखना चाहिए। चीन और अमेरिका के बीच सहयोग से दोनों को फायदा होगा, जबकि टकराव दोनों को नुकसान पहुंचाएगा- यह एक सच्चाई है जो बार-बार साबित हुई है।

वर्तमान में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय चीन पर लगाए गए टैरिफ की समीक्षा के अगले चरण का संचालन कर रहा है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि अमेरिका क्या फैसला करता है, चीनी पक्ष अभी भी वही बात कहेगा: अगर बातचीत करना चाहता है, तो दरवाजा खुला है; अगर लड़ना चाहता है, तो चीन अंत तक लड़ेगा। आशा है कि अमेरिका अपनी विफलताओं से सबक लेगा और अपनी गलतियों को ठीक करेगा। इतिहास ने साबित किया है और आगे भी करता रहेगा कि “ऊंची दीवार के साथ छोटा आंगन” बनाना केवल खुद को फंसाया जा सकता है, और दरवाजा खोलने से सहयोग का भविष्य जीता जा सकता है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)