शिनच्यांग आदि मुद्दों का उपयोग कर चीन को दबाने की मंशा सफल नहीं होगी

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर व्यापक विकासशील देश मानवाधिकार मुद्दे के राजनीतिकरण का विरोध करते हैं। कुछेक पश्चिमी देशों द्वारा शिनच्यांग आदि मुद्दों का उपयोग कर चीन का दमन करने वाली कुचेष्टा कतई सफल नहीं होगी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने 1 नवंबर को पेइचिंग में आयोजित नियमित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।  

रिपोर्ट के अनुसार, 31 अक्तूबर को 77वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के सम्मेलन में 60 से अधिक देशों ने संयुक्त भाषण देते हुए कहा कि शिनच्यांग, हांगकांग और तिब्बत मामला चीन का आंतरिक मामला है। वे मानवाधिकार मुद्दे के राजनीतिकरण और दोहरे मापदंड का विरोध करते हैं, मानवाधिकार के बहाने चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध करते हैं। उनका विचार है कि विभिन्न पक्षों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सिद्धांत का सख्ती से पालन करना चाहिए, विभिन्न देशों के लोगों का अपनी राष्ट्रीय स्थिति के अनुसार विकास पथ चुनने के अधिकार का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने बल देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकता और सहयोग मजबूत करते हुए संयुक्त रूप से मानवाधिकार को बढ़ावा देते हुए इसकी रक्षा करनी चाहिए।

प्रवक्ता चाओ लीच्येन ने कहा कि क्यूबा ने 66 देशों का प्रतिनिधित्व कर संयुक्त भाषण दिया, इसके अलावा, अन्य 30 देशों ने एकतरफा भाषण, संयुक्त पत्र आदि के माध्यम से चीन का समर्थन किया। यूएन मानवाधिकार परिषद के 51वें सम्मेलन के बाद से करीब 100 देशों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में न्याय की आवाज देकर चीन के वैध रूख के लिए समझ और समर्थन व्यक्त किया, इससे पूरी तरह से जाहिर है कि न्याय लोगों के मन में बसता है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)