हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 7 नवंबर

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सोरठि महला ४ ॥ आपे कंडा आपि तराजी प्रभि आपे तोलि तोलाइआ ॥ आपे साहु आपे वणजारा आपे वणजु कराइआ ॥ आपे धरती साजीअनु पिआरै पिछै टंकु चड़ाइआ ॥१॥ मेरे मन हरि हरि धिआइ सुखु पाइआ ॥ हरि हरि नामु निधानु है पिआरा गुरि पूरै मीठा लाइआ ॥ रहाउ ॥ आपे धरती आपि जलु पिआरा आपे करे कराइआ ॥ आपे हुकमि वरतदा पिआरा जलु माटी बंधि रखाइआ ॥ आपे ही भउ पाइदा पिआरा बंनि बकरी सीहु हढाइआ ॥२॥ आपे कासट आपि हरि पिआरा विचि कासट अगनि रखाइआ ॥ आपे ही आपि वरतदा पिआरा भै अगनि न सकै जलाइआ ॥ आपे मारि जीवाइदा पिआरा साह लैदे सभि लवाइआ ॥३॥ आपे ताणु दीबाणु है पिआरा आपे कारै लाइआ ॥ जिउ आपि चलाए तिउ चलीऐ पिआरे जिउ हरि प्रभ मेरे भाइआ ॥ आपे जंती जंतु है पिआरा जन नानक वजहि वजाइआ ॥४॥४॥

अर्थ: वह तराजू भी प्रभू आप ही है, उस तराजू की सुई भी प्रभू आप ही है, प्रभू ने आप ही वट्टे से (इस सृष्टि को) तोला हुआ है (अपने हुक्म में रखा हुआ है)। प्रभू आप ही (इस धरती पर व्यापार करने वाला) साहूकार है, आप ही (जीव-रूप हो कर) व्यापार​ करने वाला है, आप ही व्यापार कर रहा है। हे भाई! प्रभू ने आप ही धरती पैदा की हुई है (अपनी मर्यादा रूप तराजू के) पिछले छाबे में चार मासे का तोल रख कर (प्रभू ने आप ही इस सृष्टि को अपनी मर्यादा में रखा हुआ है। यह काम उस प्रभू के लिए बहुत साधारण और आसान है) ॥१॥ हे मेरे मन! सदा परमात्मा का सिमरन कर, (जिस किसी ने परमात्मा को सिमरिया है, उस ने) सुख पाया है। हे भाई! परमात्मा का नाम (सभी) सुखों का ख़ज़ाना है (जो मनुष्य​ गुरू की शरण आया है) पूरे गुरू ने उस को परमात्मा का नाम मीठा अनुभव करा दिया है ॥ रहाउ ॥ हे भाई! प्रभू प्यारा आप ही धरती पैदा करने वाला है, आप ही पानी पैदा करने​ वाला है, आप ही सब कुछ करता है आप ही (जीवों से सब कुछ) कराता है। आप ही अपने हुक्म अनुसार हर जगह कार्य चला रहा है, पानी को मिट्टी से (उस ने अपने हुक्म में ही) बांध रखा है (पानी मिट्टी को रोड़ नहीं सकता।) (पानी में उस ने) आप ही अपना डर पा रखा है, (मानों बकरी शेर को बांध कर फिरा रही है ॥२॥ हे भाई! प्रभू आप ही लकड़ी (पैदा करने​ वाला) है, (आप ही आग बनाने वाला है) लकड़ी में उस ने अाप ही आग टिका रखी है। प्रभू प्यारा आप ही अपना हुक्म चला रहा है (उस के हुक्म में) आग (लकड़ को) जला नहीं सकती। प्रभू आप ही मार के जीवालण वाला है। सारे जीव उस के प्रेरे होए ही स्वास ले रहे हैं ॥३॥ हे भाई! प्रभू आप ही ताकत है, आप ही (ताकत वरतने वाला) हाकम है, (सारे जगत को उस ने) आप ही कार्य में लगाया हुआ है। हे प्यारे सजन! जैसे प्रभू आप जीवों को चलाता है, जैसे मेरे हरी-प्रभू को अच्छा लगता है, वैसे ही चला​ सकता है। दास नानक जी! प्रभू आप ही (जीव-) वाजा (बनाने वाला) है, आप वाजा वजाने वाला है, सारे जीव-वाजे उसे के वजाए वज रहे हैं ॥४॥४॥