बाल शोषण, सीधे मायने में देश का शोषण, परिवार और समाज संयुक्त रुप से करें सुधार: विधानसभा स्पीकर संधवां

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डीगढ़: पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां शनिवार को पीजीआई में ऐसोसियेशन ऑफ पेडरिटिश्यंस (एओपी), चंडीगढ़ कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाईल्ड राईट्स (सीसीपीसीआर) और मोहाली स्थित साहिबजादा ऐकेडमी ऑफ पेडरेटिक्स (सेप) और इंडियन ऐकेडमी ऑफ पेडरिटिश्यंस द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित बाल उत्पीडन और अधिकारों को संबोधित करती दो दिवसीय – केनक्लोन 2022 कांफ्रेंस के उद्घाटन में शामिल हुए। इस अवसर पर कुलतार संधवां ने कहा कि बाल उत्पीड़न और उनके अधिकार समाज और देश से जुड़ा एक संवेदनशील विषय है। जबकि बाल विकास परिवार ही नहीं बल्कि देश का भविष्य है।

उन्होंनें कहा कि भारत की विश्व में सबसे युवा जनसंख्या हैं। इसके लिये हमारी परवरिश में यदि कोई कमी के चलते उनका शोषण हो रहा तो सीधे मायने वह देश का शोषण हो रहा है। इसलिये परिवार, समाज और देश को सामूहिक रुप से बच्चों की संभाल की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने विभिन्न जिलों से आये पुलिस प्रमुखों के लिये घोषणा भी की यदि वे अपने जिले में कम से कम दस स्ट्रीट चिल्ड्रन के जीवन में बदलाव लायें तो उन्हें विधानसभा में विशेष रुप से सम्मानित किया जाएगा।

आयोजन के चैयरपर्सन पीजीआई स्थित पेडरिटिश्यंस विभाग की डॉ. कन्या मुखोप्ध्याय और आयोजन सचिव जतिंदर शर्मा ने बताया कि वर्किंग टूगैदर फॉर चाइल्डस राईट्स एंड प्रोटेक्शन नामक इस काफ्रेंस में देश और विदेश के स्टेकहोल्डर्स जुडकर बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिये सुदृढ़ एक्शन प्लान भी तैयार कर रहे हैं। उन्होंनें इस बात पर बल दिया कि बच्चों और किशोरों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनायों के बीच उन्हें जागरुक करने वाले ऐसे प्लेटफार्म सार्थक साबित होंगें।

इस दौरान पंजाब पुलिस की अतिरिक्त डीजीपी काम्युनिटी अफैयर्स गुरप्रीत दियो ने बताया कि पुलिस समाजिक उत्थान में एक अभिन्न भूमिका निभा सकती है। प्रदेश के थानों में गठित चाइल्डस वेल्फेयर पुलिस आफिसर से बच्चों के प्रति अपराध रोकने में सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंनें इस बात पर भी बल दिया कि पुलिस को अपनी पारम्परिक भूमिका के साथ ‘सेंसीटिव पोलिसिंग’ की भी जरुरत हैं। इस अवसर पर सीसीपीसीआर की चैयरपर्सन हरजिंदर कौर ने अपने संबोधन में गुड पेरेटिंग का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों की संभाल उन्हें सशक्त करने की पहली सीढी है, जिसके लिये अभिभावकों को ही नहीं बल्कि घर के बाहर स्कूली टीचरों को भी एक सहज व्यवहार से पेश आना चाहिए।

इस कार्यक्रम के दौरान साईबर बुलिंग पर अपने लैक्चर के दौरान डॉ. छाया प्रसाद ने कहा कि बच्चों में टीवी से आगे अब मोबाईल और इंटरनेट का प्रचलन काफी बढ़ गया है। जिससे वे उनके व्यवहार में काफी उतेजित हो जाते हैं। उन्होंनें सुझाया कि अभिभावक अपने बच्चों से इंटरनेट पर गुजरे समय का फीडबैक अवश्य लें। और साथ ही वे अपने बच्चों के साथ क्वालिटी समय भी व्यतीत करें। अंत में ऐसोसियेशन के पेटर्न और पीजीआई के पूर्व निदेशक बीएनस वालिया ने संबंधित विषय पर प्रकाश डालते हुए गुड पेरेटिंग के टिप्स भी दिये।