पिघलते ग्लेशियरों से निकल रहे लाखों टन बैक्टीरिया

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यूरोप और कनाडा में किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि ग्लेशियरों के पिघलने से लाखों टन बैक्टीरिया निकल रहे हैं। शोधकर्ताओं ने गुरुवार को यह जानकारी दी। शोधकर्ताओं ने कहा कि कनाडा, स्वीडन, स्वालबार्ड और पश्चिमी ग्रीनलैंड में पिघल रहे ग्लेशियर के साथ-साथ बड़ी मात्रा में बैक्टीरिया भी बाहरी सतह पर आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। इन बैक्टीरिया पर अध्ययन की इसलिए आवश्यकता है ताकि किसी भी संभावित रोगजनकों की पहचान की जा सके। उन्होंने बताया कि हिमालय हिंदू कुश क्षेत्र का नमूना लेना अभी बाकी है। अध्ययन में पाया गया कि वैश्विक तापन के लिए भविष्य के सभी परिदृश्यों में हर साल सैकड़ों-हजारों टन रोगाणुओं को छोड़ा जाएगा। बैक्टीरिया और सैवाल में आमतौर पर खुद को सूरज की रोशनी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए पिगमेंट होते हैं। लेकिन ये डार्क पिगमेंट सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करते हैं, जिससे उनके बर्फीले आवास के विनाश में तेजी आती है।