इस्पात उद्योग ने इस्पात निर्यात पर शुल्क कटौती के फैसले को सराहा

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सरकार के इस्पात की वस्तुओं पर निर्यात शुल्क हटाने के फैसले से इस्पात की मांग बढ़ेगी। उद्योग के सदस्यों ने शनिवार को यह बात कही। सरकार ने 21 मई को कर लगाने के छह महीने बाद 19 नवंबर, 2022 से स्टील उत्पादों और लौह अयस्क पर निर्यात शुल्क में कटौती की है। वित्त मंत्रालय की शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, निर्दिष्ट कच्चा लौह और इस्पात उत्पादों के साथ-साथ लौह अयस्क छर्रों के निर्यात पर ‘शून्य’ निर्यात शुल्क लगेगा।

जेएसडब्ल्यू स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक और समूह के मुख्य वित्त अधिकारी शेषागिरी राव ने कहा, ”घरेलू इस्पात की मांग को पुनर्जीवित करने के लिए यह एक बड़ा औषधि होगा। खासकर तब जब वैश्विक इस्पात की मांग में भारी गिरावट आ रही है।” भारतीय इस्पात संगठन (आईएसए) के महासचिव आलोक सहाय ने कहा कि मुद्रास्फीति के उचित स्तर पर आने के तुरंत बाद यह फैसला आम आदमी और उद्योग के लिए सरकार की चिंता को दर्शाता है। जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक जिंदल ने इसे बहुप्रतीक्षित कदम बताया। जिंदल ने कहा, ”घरेलू विनिर्माताओं को वैश्विक समकक्षों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए यह समय की जरूरत थी। मुझे विश्वास है कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और सरकार के स्थानीय से वैश्विक दृष्टिकोण को जोर देगा।”