रिवाज अथवा ताज बदलने को लेकर कयास लगा रहे विश्लेषक, 32 सालों में Himachal में रिपीट नहीं हुई सरकार

Spread the News

शिमला : 14वीं हिमाचल विधान सभा के मतदान के एक सप्ताह बाद भी राजनीतिक पंडित नतीजों को लेकर सिर्फ कयास ही लगा पा रहे हैं। चुनाव में रिकार्ड 75.6 फीसदी मतदान ने राजनीतिक पंडितों को उलझा कर रख दिया है। हिमाचल के चुनाव को लेकर विश्लेषण करने वाले वरिष्ठ खबरनवीश भी राजनीतिज्ञों की तरह ही किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे। रिकार्ड मतदान के बीच पुरुषों की तुलना में महिलाओं का 4 फीसदी अधिक मतदान की व्याख्या विश्लेषकों के साथ साथ राजनीतिक दल भी अपने अपने हिसाब से करने लगे हैं। आलम यह है कि कॉफी हाउस से लेकर प्रत्येक चौराहे व कार्यालय में चुनावी चर्चा में मशगूल लोगों में से कोई रिवाज बदलने, तो कोई ताज बदलने की बात कह रहा है। हिमाचल में बीते 3 दशकों में हुए प्रत्येक चुनाव में कांग्रेस व भाजपा बारी बारी से सत्ता में आती रही हैं।

1990 में जनता दल के साथ गठबंधन के बाद भाजपा ने चुनाव लड़ा, भाजपा ने 47 व जनता दल को 11 सीटों पर जीत मिली। मगर बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद शांता कुमार के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार शहीद हो गई। 1993 के चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला। कांग्रेस को 59 व भाजपा को 8 सीटों पर ही जीत मिली। मगर 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस के चुनाव मैदान में होने की वजह से प्रदेश में त्रिशकूं विधान सभा आई। साथ ही निर्दलीय चुनाव जीत कर रमेश धवाला विधान सभा पहुंचे। स्व. पंडित सुखराम के नेतृत्व वाली हिविकां के 5 विधायकों पंडित सुखराम, मन्शा राम, प्रकाश चौधरी, डॉ राम लाल मारकंडा व महेंद्र सिंह के साथ साथ निर्दलीय रमेश धवाला के सहयोग से प्रो. धूमल के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी। 1998 में ही भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक लगाते हुए कांग्रेस विधायक एवं वरिष्ठ नेता गुलाब सिंह को विधान सभा अध्यक्ष बनाया।

नतीजतन कांग्रेस अल्पमत में रही। इसके बाद 2003 में कांग्रेस, 2007 में भाजपा व 2012 में कांग्रेस तथा 2017 में फिर भाजपा सरकार प्रदेश में बनी। आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश बीते 7 चुनावों में कांग्रेस व भाजपा बारी बारी से सत्ता में आती रही हैं। हिमाचल के चुनाव में पहली मर्तबा आम आदमी पार्टी ने 67 विधान सभा सीटों पर उम्मीदवारों को उतारा। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद हिमाचल में भी पार्टी का ग्राफ ऊपर आता दिख रहा था, मगर आप के हिमाचल में पांव जमाने से पहले ही भाजपा व कांग्रेस ने इसके खेमे में सेंधमारी की। लिहाजा चुनाव से पहले जहां आम आदमी पार्टी को लेकर चर्चाएं हो रही थी, वहीं मतदान से पहले सप्ताह तक प्रदेश में अधिकांश सीटों पर मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के मध्य सिमट गया।

एक दर्जन के करीब विधान सभा क्षेत्रों में तो कांग्रेस व भाजपा के बागियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाया। विधान सभा चुनाव में भाजपा ने रिवाज बदलने का नारा दिया। कांग्रेस ने आ रही है कांग्रेस का नारा दिया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री व कांग्रेस प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कई जनसभाओं में कहा कि रिवाज नहीं ताज बदलेगा। मगर भारी मतदान की वजह से चुनाव नतीजों को लेकर बेशक अभी कयास लगाए जा रहे हों, मगर चुनाव में दमदार बागियों की वजह से कोई यह नहीं कह पा रहा कि रिवाज बदलेगा अथवा ताज। जाहिर है कि विश्लेषक सिर्फ कयासों में उलझ कर रह गए हैं। लिहाजा अब 8 दिसंबर को चुनाव नतीजों के बाद ही स्थिति साफ होगी।