पृथ्वी को बचाने के लिए विकसित देश अपने वचनों का पालन करें

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कई विवादों के बाद संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन की ढांचागत संधि के संस्थापकों का 27वां सम्मेलन(कोप27) 20 नवम्बर को मिस्र के शर्म अल शेख में संपन्न हुआ, जो पूर्व योजना की तुलना में 36 घंटे ज्यादा चला। सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें सब से ध्यानाजनक उपलब्धि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित विकासशील देशों ओर कमजोर देशों को मदद देने के लिए नुकसान और क्षति कोष की स्थापना की पुष्टि करना है। इसने विकासशील देशों की अपील की प्रतिक्रिया की, जो एक बहुत मूल्यवान उपलब्धि है और जलवायु परिवर्तन का वैश्विक निपटारा करने के लिए एक सक्रिय प्रेरणा भी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने बयान जारी कर कहा कि सम्मेलन ने न्यायता का प्रसार करने के लिए अहम कदम बढ़ाया है।

सब से बड़ा विकासशील देश होने के नाते चीन हमेशा जलवायु समस्या का निपटारा करने के लिए यथार्थ कदम उठाता रहा है। 2012 से 2021 तक चीन ने वार्षिक 3 प्रतिशत की ऊर्जा खपत पर निर्भर रह कर औसत 6.5 प्रतिशत का आर्थिक विकास पूरा किया था। 2021 में चीन में प्रति इकाई जीडीपी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन 2012 से लगभग 34.4 प्रतिशत कम हो गया, जो कार्बन डाइऑक्साइड की निकासी में 3.7 बिलियन टन कम होने के बराबर है। अक्षय ऊर्जा में चीन का संचयी निवेश दुनिया में पहली रैंकिंग पर रहा, जिसकी कुल मात्रा 3.80 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंची है।

कोप27 में चीनी प्रतिनिधिमंडल करीब सौ मुद्दों के सलावह-मशविरे में शामिल हुआ और विकासशील देशों के समान हितों की रक्षा की और सम्मेलन में सिलसिलेवार सक्रिय उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिए बड़ा योगदान दिया है। चीनी प्रतिनिधि ने कहा कि चीन सरकार ने 2020 में निकासी को कम करने के वचन का पालन करने के आधार पर 2030 से पहले कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन शिखर तक पहुंचने और 2060 से पहले कार्बन तटस्थता हासिल करने का प्रयास करने का वादा किया है। सीपीसी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस में मनुष्य और प्रकृति के बीच सद्भाव के आधुनिकीकरण का निर्माण करने पर जोर दिया गया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का निपटारा करने के लिए चीन की कार्यवाही वादे से कहीं ज्यादा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने कहा कि हमारी पृथ्वी अभी भी आपातकालीन कक्ष में है। पेरिस समझौते को साकार करने के लिए नारे के बजाये एक्शन की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन का निपटारा करने के लिए हमारे सामने बहुत ज्यादा चुनौतियां हैं और बाद में कई काम करने की आवश्यकता है। जिनमें महत्वपूर्ण बात यह है कि विकसित देशों को अपने वचनों का पालन कर यथार्थ कार्रवाई करनी होगी। 

साभार—चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग