आने वाली पीढ़ियों के लिए नीला समुद्र और आकाश छोड़ें

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खुला, समावेशी और सहजीवी समुद्र मानव सभ्यता की पृष्ठभूमि है और अन्वेषण व नवाचार के लिए अंतहीन शक्ति पैदा करता है। सभी प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों में से समुद्र सबसे बड़ा है। समुद्री सभ्यता मूल पारिस्थितिकी का स्रोत और पारिस्थितिक सभ्यता का परिसर व आधार है। मानव समाज के अस्तित्व और विकास के लिए समुद्र बहुत महत्वपूर्ण है। समुद्र जीवन को जन्म देता है, दुनिया को जोड़ता है और विकास को बढ़ाता है। जिस नीले ग्रह पर मनुष्य रहता है, वह समुद्र द्वारा अलग-अलग द्वीपों में विभाजित होने के बजाय एक साझा भविष्य समुदाय बनाने के लिए समुद्र से जुड़ा हुआ है और सभी देशों के लोग सुख-दुःख साझा करते हैं। समुद्र की शांति और स्थिरता दुनिया के सभी देशों की सुरक्षा और हितों से संबंधित है। इसे संयुक्त रूप से बनाए रखने और पोषित करने की आवश्यकता है।

चीन दुनिया में सबसे धनी समुद्री जैव विविधता वाले देशों में से एक है। चीन में समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के प्रकार समृद्ध और विविध भी हैं। उत्तरी चीन से दक्षिणी चीन तक, मुहाने, खाड़ी, ज्वारीय आर्द्रभूमि, प्रवाल भित्तियां, मैंग्रोव वन और समुद्री घास के बिस्तर (समुद्री घास के मैदान) आदि ये महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र वितरित हुए हैं, जो समुद्री पारिस्थितिक सुरक्षा को बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं, महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवासों का निर्माण करते हैं, विभिन्न उत्पाद आपूर्ति प्रदान करते हैं और मानव व समुद्र के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध आदि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि लोगों को समुद्री पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण पर ध्यान देना, समुद्री पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम व नियंत्रण को मजबूत करना, समुद्री जैव विविधता की रक्षा करनी, समुद्री संसाधनों के व्यवस्थित विकास व उपयोग का एहसास करना चाहिए। भविष्य की पीढ़ियों के लिए नीला समुद्र और आकाश छोड़ना चाहिए।

दुनिया के सबसे बड़ा विकासशील देश के रूप में चीन ने “डबल कार्बन” लक्ष्य (कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन वर्ष 2030 से पहले चरम पर पहुंचना और वर्ष 2060 तक कार्बन तटस्थता प्राप्त करना) का प्रस्ताव किया। इसका अर्थ यह है कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी कार्बन उत्सर्जन कमी हासिल करेगा। समुद्र इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। “डबल कार्बन” लक्ष्य की प्राप्ति समुद्र के सतत विकास और समुद्री पारिस्थितिक सभ्यता के निर्माण से अविभाज्य है। अब चीन ने एक समुद्री पारिस्थितिक पूर्व चेतावनी व निगरानी प्रणाली की प्रारंभिक स्थापना की है और मैंग्रोव वन के संरक्षण व बहाली के लिए विशेष कार्य योजना एवं समुद्री पारिस्थितिक संरक्षण व बहाली परियोजना लागू की हैं। पूरे चीन में समुद्री प्रकृति आरक्षित क्षेत्रों की कुल संख्या 145 पहुंची है, जिनका कुल क्षेत्रफल 79.1 हेक्टेयर है। चीन ने नीली खाड़ी और तटीय संरक्षण व बहाली आदि 143 परियोजनाओं को लागू किया है।

चीन ने 1.5 हजार किलोमीटर की तटरेखा, 30 हजार हेक्टेयर तटीय आर्द्रभूमि का पुनर्वास और पुनर्स्थापन किया है। साथ ही चीन ने 72 किलोमीटर समुद्री दीवार का पारिस्थितिक निर्माण किया है। चीन में प्रवाल भित्तियां, मैंग्रोव वन और समुद्री घास के बिस्तर (समुद्री घास के मैदान) आदि महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र प्रभावित रूप से सुरक्षित हुए हैं। चीन में समुद्री जैव विविधता में काफी सुधार हुआ है। इसके अलावा पूरे देश में 30 प्रतिशत तटीय जल और 37 प्रतिशत महाद्वीपीय समुद्र तट को पारिस्थितिक संरक्षण रेड लाइन नियंत्रण के दायरे में शामिल किया गया है। भविष्य में चीन समुद्री संसाधन संरक्षण व विकास प्रणाली में सुधार करना जारी रखेगा, एक मजबूत समुद्री पारिस्थितिक सुरक्षा अवरोध का निर्माण करेगा, समुद्री अर्थव्यवस्था के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ाएगा और “मानव जाति की आम नीली मातृभूमि” की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ प्रयास करेगा।

(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)