अगर आप भी बनाने जा रहे है नया घर, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार इन बातों का रखें खास ध्यान

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घर बनाना हर एक इंसान का बहुत ही बढ़ा सपना होता है। हर इंसान अपने जीवन की सारि कमाई घर बनाने में लगाते है। लेकिन क्या आप जानते है कि घर बनाने से पहले हमें वास्तु का ध्यान रखना बेहद आवश्यक होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सही दिशा में घर और कमरे बनाना बेहद शुभ होता है इससे घर में सुख शांति और खुशाली बनी रहती और और इसी के साथ साथ घर की नकारात्मकता भी दूर होती है। माना जाता है कि अगर घर का वास्तु शास्त्र गलत हो तो उसका हमारे जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। आज हम आपको इसे से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताने जा रहे है। तो आइए जानते है क्या है वो कुछ खास बातें:

वास्तु शास्त्र में 16 प्रकार के कक्षों का स्थान तय किया गया है, जिन्हें उन्हीं स्थान पर बनाना मकान मालिक के लिए हर तरह से शुभ माना गया है. ये स्थान व दिशा इस तरह हैं:-
पूजा स्थान: ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व दिशा.
स्वागत कक्षा: ईशान कोण या पूर्व दिशा का मध्य स्थान.
स्नान घर: पूर्व दिशा.

घी व दही मंथन का स्थान: पूर्व दिशा तथा आग्नेय कोण यानि उत्तर- पूर्व के बीच का स्थान.
रसोई: आग्नेय कोण यानि दक्षिण- पूर्व दिशा.
घी, तेल व पिसने का स्थान: आग्नेय कोण तथा दक्षिण दिशा के बीच का स्थान.
शयन कक्ष: दक्षिण दिशा.

शोचालय: नैऋत्य कोण यानि दक्षिण- पश्चिम या दक्षिण दिशा.
शस्त्र भण्डार: नैऋत्य कोण.
अध्ययन कक्ष: नैऋत्य कोण तथा पश्चिमी दिशा के मध्य.
भोजन कक्ष: पश्चिमी दिशा.

सभा कक्ष: पश्चिमी दिशा तथा वायव्य कोण यानि दक्षिण- पश्चिम का मध्य स्थान.
अन्न भण्डार या पशु घर: वायव्य कोण.
शयन कक्ष (संभोग स्थान): वायव्य कोण तथा उत्तर दिशा का मध्य स्थान.
धन संग्रह कक्ष: उत्तर दिशा.
औषधि गृह: उत्तर दिशा तथा ईशान कोण के मध्य.

भवन के लिए भूमि का शुभ आकार
भवन निर्माण के समय व्यक्ति को भूमि के शुभ आकार को भी ध्यान में रखना चाहिए. इस लिहाज से वृत्ताकार, वर्गाकार, आयताकार व गोमुखाकार भूमि को आवास तथा सिंहमुखाकार भूमि को व्यवसाय के लिए श्रेष्ठ माना गया है.