तिब्बत की महत्वपूर्ण सीमांत काउंटी यातुंग समृद्धि के रास्ते पर चल रही है

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यातुंग काउंटी चीन के तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के दक्षिण और हिमालयपर्वत श्रृंखला के मध्य में स्थित है। वह भारत और भूटान से लगा है,जो चीन का एक महत्वपूर्ण सीमांत स्थल है। इधर के कुछ साल अपने भौगोलिक लाभ और सरकार के समर्थन से प्राचीन इतिहास वाला या तुंग समृद्धि के रास्ते पर तेजी से चल रहा है। वर्ष 1929 में मशहूर भारतीय हिंदी लेखक राहुल सांकृत्यायन ने अपनी तिब्बत यात्रा के वृतांत मेंलिखा था कि या तुंग की सुंदरता से मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। यहां की एक विशेषता है कि जल संसाधान प्रचुर और वनस्पति घनी है। यहां साल भर हराभरा नजर आता है और देवदार के ऊंचे ऊंचे वृक्ष होते हैं। इस के साथ यहां पक्षियों का आदर्श बसेरा भी है। तरह तरह के पक्षी उड़ते नजर आते हैं। राहुल सांकृत्यायन ने जो या तुंग का प्राकृतिक दृश्य देखा ,वह आज तक जस का तस है। पर स्थानीय बुनियादी संस्थापन और लोगों के जीवन में कायापलट आया है।

या तुंग काउंटी स्थित नाथुला दर्रा पोर्ट चीन-भारत व्यापार के लिए सब से छोटा थलीय रास्ता है। नाथुला दर्रा और कोलकाता की दूरी सिर्फ 550 किलोमीटर है। इसी कारण या तुंग प्राचीन सेल्क रोड की दक्षिण लाइन पर एक मशहूर पड़ाव था। वर्ष 2006 में नाथुला पोर्ट की बहाली के साथ या तुंग का अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी बहाल होने लगा। वर्ष 2013 में चीन द्वारा प्रस्तुत बेल्ट एंड रोड पहल का नया मौका पकड़ कर यां तुंग का आर्थिक विकास एक्सप्रेस वे में दाखिल हुआ। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक नाथुला पोर्ट के सीमांत व्यापार की मात्रा 15 लाख 80 हजार युआन से 15 करोड़ युआन पर जा पहुंची ,जो लगभग 100 गुने से अधिक बढ़ा। इस से अपार व्यापारिक संभावना दिखती है। वर्ष 2015 में नाथुला दर्रा भारत के तीर्थयात्रियों के लिए औपचारिक रूप से खुला। या तुंग जल्दी से अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बन गया। सुंदर प्राकृतिक दृश्य ,प्राचीन इतिहास और विशिष्ट स्थानीय रीति रिवाज असंख्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। गौतरलब है कि वर्ष 2018 में 500 भारतीय तीर्थयात्री नाथुला दर्रे से चीन आये। वर्ष 2017 में या तुंग काउंटी में अति गरीबी पूरी तरह दूर की गयी, जो तिब्बत में गरीबी उन्मूलन पूरा करने वाले पहले जत्थे की पांच काउंटियों में से एक है। श्या मासी कस्बा यु तुंग का सब से अहम कस्बा है, जहां काउंटी सरकार स्थित है। कस्बे में कई दो या तीन मंजिली वाली इमारतें हैं। पहली मंजिल में आम तौर पर विभिन्न किस्मों की दुकानें हैं और ऊपरी मंजिल पर लोग रहते हैं। वहां रह रही दो बूढ़ी महिलाओं ने सीएमजी के संवाददाता को बताया कि उनकी आय का एक मुख्य भाग दुकान का किराया है। इस के अलावा उन को सरकार से विभिन्न भत्ते और कल्याण मिलते हैं। वे सुखमय जीवन बिताती हैं। विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण उन के बच्चे बाहर जाने के बजाय होम टाउन में काम करते हैं। परियच के अनुसार तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की रोजगार समर्थन नीति के तहत स्थानीय युवाओं का स्टार्ट अप करने में बड़ा उत्साह है। वे रेस्तराँ खोलते हैं, परिवार होटल चलाते हैं या व्यापार, परिवहन और सर्विस बिजनिस करते हैं। 

उधर या तुंग काउंटी सरकार ने स्थानीय संसाधन विशेष पर निर्भर होकर सक्रियता से फंगस (fungus), पाली याक, तिब्बती मुर्गी-मुर्गा समेत विशिष्ट कृषि व पशुपालन उत्पादों का विकास किया और कई विशेष सहकारी समितियों की स्थापना की। इस से स्थानीय लोगों की आय वृद्धि में बड़ी मदद भी मिली। हाल ही में संपन्न सीपीसी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस की कार्य रिपोर्ट में कहा गया कि चीन बाद में उच्च स्तरीय खुलेपन को बढ़ाएगा। पश्चिम में नये थलीय पासेज के निर्माण को गति दी जाएगी। निसंदेह या तुंग समेत व्यापक सीमांत क्षेत्र विकास के नये मौके का सामना कर रहे हैं।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)