चम्पा षष्ठी: जानिए चंपा षष्ठी पर क्यों की जाती है भगवान शिव जी और कार्तिके जी की पूजा

चम्पा षष्ठी का प्रारंभ कैसे हुआ और इसकी क्या पौराणकि मान्यताएं हैं इसके बारे में अलग-अलग कथाओं का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि जब भगवान कार्तिकेय अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) और अनुज (छोटे भाई) श्री गणेश से रुष्ठ होकर कैलाश पर्वत को त्याग कर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन में जाकर निवास करने लगे थे तब मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी का ही दिन था। भगवान कार्तिकेय ने दैत्य तारकासुर का वध किया और इसी तिथि को वो देवताओं की सेना के सेनापति बने और भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया था।

इसी कारण इस दिन का बहुत महत्व है। एक दूसरी पौराणकि कथा के अनुसार भगवान शिव ने मणि-मल्ह दैत्य भाइयों से छह दिनों तक खंडोबा नामक स्थान पर युद्ध करके षष्ठी पर दोनों दानवों का वध किया था। इसी स्थान पर महादेव शिविलंग के रूप में प्रकट हुए थे। मणि-मल्ह का वध करने के लिए भगवान शिव ने भैरव व पार्वती ने शक्ति रूप लिया। इसी कारण महाराष्ट्र में रुद्रावतार भैरव को मार्तंड-मल्लहारी व खंडोबा कहा जाता है और इस दिन चम्पा षष्ठी का पर्व मनाया जाता है।