सभी प्रकार के संकटों को दूर करती है मत्स्य द्वादशी, जानिए कब मनाई जा रही है मत्स्य द्वादशी

हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मत्स्य द्वादशी मनाई जाती है। मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी ने मत्स्य का अवतार लेकर दैत्य हयग्रीव का संघार करके वेदों की रक्षा की थी। इसी वजह से इस दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है। पौराणकि मान्यताओं के अनुसार मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। मत्स्य अवतार श्रीहरि के प्रमुख अवतारों में से एक है। मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं।

मत्स्य द्वादशी कथा
सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी की असावधानी से दैत्य हयग्रीव ने वेदों को चुरा लिया। हयग्रीव द्वारा वेदों को चुरा लेने के कारण ज्ञान लुप्त हो गया। समस्त लोक में अज्ञानता का अंधकार फैल गया। तब भगवान विष्णु जी ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण कर दैत्य हयग्रीव का वध किया और वेदों की रक्षा की तथा भगवान ब्रह्मा जी को वेद सौंप दिए।