चार बच्चों को मारने वाले ‘आदमखोर तेंदुए’ को गोली मारने का आदेश

Spread the News

मेदिनीनगर : झारखंड के गढ़वा जिले के प्रादेशिक वनक्षेत्र में घूम रहे आदमखोर तेंदुए को पकड़ने में विफल होने पर गोली मारने के आधिकारिक आदेश दिए गए हैं। पलामू के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) कुमार आशुतोष ने बताया कि ‘आदमखोर तेंदुए’ को गोली मारने के आदेश के अनुसार उक्त तेंदुए को एक प्राधिकृत एजेंसी ही मारेगी। उन्होंने बताया कि इस बीच यदि किसी अन्य ने तेंदुए को मारा तो उसके विरुद्ध आपराधिक प्राथमिकी दर्ज होगी।

तेंदुए को मारने का आदेश वन्यप्राणी प्रतिपालक (वाइल्ड लाइफ वार्डन) शशि शेखर सामंत ने दिया है। यह जानकारी आरसीसीएफ कुमार आशुतोष ने दी। ‘आदमखोर’ घोषित तेंदुएं के हमले में गढ़वा जिले में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है और लातेहार जिले में तेंदुए के हमले में एक बच्ची की मौत हो चुकी है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार लातेहार जिलान्तर्गत पलामू बाघ आरक्ष (पीटीआर) के छिपादोहर में एक लङक़ी और गढ़वा जिले के रमकंडा, भंडरिया और रंका वन क्षेत्र में एक-एक बच्चों की मौत इस तेंदुए के हमले में हो चुकी है। तेंदुआ को मारने के लिए वन विभाग के निमंत्रण पर हैदराबाद से आये विशेष शिकारी नवाब शपथ अली खान पिछले एक पखवाड़े से गढ़वा के जंगलों में उसकी तलाश में हैं।

आरसीसीएफ ने बताया कि तेंदुए को पकङ़ने के लिए चार आटोमैटिक (स्वचालित) पिजड़े चार अलग-अलग वन क्षेत्र में रखे गये हैं और उसे जाल में फांसने के लिए उसमें बकरी एवं सूअर को रखा गया है। उन्होंने बताया कि हालांकि पिजड़ों में अबतक तेंदुआ नहीं फंसा है। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त, 50 ट्रैपिंग कैमरे भी लगाये गये हैं, फिर भी उसकी तस्वीर उसमें अभी तक कैद नहीं हो पायी है।

आशुतोष ने बताया कि वन विभाग तेंदुआ को पकङने की भरसक कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि तेंदुए को बेहोश करके कैद करने की योजना है और ऐसा नहीं हो पाया तब उसे सीधे गोली मारने के आदेश पर अमल होगा। उल्लेखनीय है कि आदमखोर तेंदुए का विचरण क्षेत्र पलामू बाघ अभयारण्य और गढ़वा जिले के प्रादेशिक वन आपस में सटे हैं। इसलिए उसके इन दोनों क्षेत्रों में कहीं भी पाये जाने की संभावना है।