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दिन और रात के बदलने का प्रकृति नियम

April 22, 2023

दिन और रात के बदलने का प्रकृति नियम

दिन के बाद रात और रात के बाद दिन यही प्रकृति का नियम है। सृष्टि के आरम्भ से ही ईश्वर ने यह विधान हमारे लिए बनाया है। सूर्य प्रात:काल होते ही उदय होता है तब दिन होता है। जब चन्द्रमा प्रकट होता है तब रात्रि होती है। संध्या समय होने पर सूर्य अस्त हो जाता है और प्रात: होने पर चन्द्रमा विदा ले लेता है। सूर्य व चन्द्र के उदित और अस्त होने का यह क्रम निर्बाध रूप से निरन्तर चलता रहता है। इसमें कहीं कोई त्रुटि नहीं होती। न ही उन दोनों को कोई प्रतिदिन कोई काम पर जाने का आदेश देता है और न ही कोई अलार्म उन्हें जगाता है।

कभी इन दोनों ने यह नहीं सोचा कि हम प्रतिदिन अपनी ड्यूटी करके थक गए हैं, चलो इंसानों की तरह चार दिन की छुट्टी करके आराम कर लें अथवा देशविदेश में कहीं भी घूम आएं या किसी हिल स्टेशन की सैर कर आएं। कल्पना कीजिए यदि ऐसी स्थिति कभी आ जाए तब क्या होगा? सूर्य के न होने पर चारों ओर बर्फ का साम्राज्य हो जाएगा। हम गरमी और प्रकाश पाने के लिए छटपटाएंगे। दिन नहीं होगा और चारों ओर अंधकार की चादर बिछी हुई दिखाई देगी। नदियों और नालों का सारा पानी जम जाएगा। हम पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेंगे।

खाने के लिए भी हमें परेशानी हो जाएगी। इसी प्रकार चन्द्रमा के न होने पर रात नहीं होगी। उसकी शीतलता से हम वंचित हो जाएंगे। सूर्य का प्रचण्ड प्रकोप हमें सहना पड़ेगा। इस प्रकार इन दोनों में से किसी एक के भी अवकाश पर चले जाने से सारे मौसमों और सारी ऋतुओं का चक्र गड़बड़ा जाएगा। एवंविध सूर्य और चन्द्रमा के न होने की अवस्था में सारी सृष्टि में त्रहि माम वाली परिस्थिति उत्पन्न हो जाएगी। इसी प्रकार अन्य प्राकृतिक संसाधनों के न होने पर भी स्थिति बिगड़ जाएगी। ईश्वर ने हम मनुष्यों को हर प्रकार का सुख और आराम देने के लिए सारा मायाजाल अथवा आडम्बर रचा है।

हमारे लिए उस मालिक ने दिन और रात बनाए हैं। इसका उद्देश्य यही है कि अपने स्वयं के लिए और घर-परिवार के दायित्वों को पूर्णरूपेण निभाने के लिए दिन भर जीतोड़ परिश्रम करो। जब थककर चूर हो जाओ तब रात हो जाने पर चैन की बांसुरी बजाते हुए घोड़े बेचकर सो जाओ। अगली प्रात: तरोताजा होकर फिर से अपने काम में जुट जाओ। मनुष्य सारा दिन हाड़ तोड़ मेहनत करके जब थक-हारकर घर आता है तब उसे आराम करने की बहुत आवश्यक होता है। अगर ईश्वर ने रात न बनाई होती तो मनुष्य सो नहीं पाता।

नींद न ले पाने के कारण अनिद्रा से परेशान होकर वह अनेक बीमारियों से ग्रस्त हो जाता। फिर डाक्टरों के चक्कर लगाते हुए बहुमूल्य समय व धन की बरबादी होती। सूर्य का उदय होना हमें नवजीवन का संदेश देता है और उसका अस्त होना जीवन के अंतकाल का परिचायक है। सूर्य और चन्द्र दिन और रात के प्रतीक हैं जो हमें समझाते हैं कि जीवन में दुखों एवं कष्टों से पूर्ण रात कितनी भी लम्बी हो, उसके बाद प्रकाश आता है। सूरज और चंदा की तरह जीवन में भी दिन और रात की तरह सुख एवं दुख की आंख मिचौली चलती रहती है। इसलिए जीवन में हार न मानते हुए आगे बढ़ो।

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