Last Updated: November 5, 2026

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जीजेएम ने ‘गोरखालैंड’ मुद्दे पर बीजेपी से दूरी बनाने के दिए संकेत

July 28, 2023

जीजेएम ने ‘गोरखालैंड’ मुद्दे पर बीजेपी से दूरी बनाने के दिए संकेत

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में दार्जिलिंग और कलिम्पोंग की पहाड़ियों में हार का सामना करने के बाद, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) सुप्रीमो बिमल गुरुंग ने भाजपा से तब तक दूूरी बनाने का संकेत दिया है, जब तक भगवा खेमा अलग ‘गोरखालैंड’ राज्य के मुद्दे पर अपना निश्चित दृष्टिकोण घोषित नहीं कर देताा।

उन्होंने कहा, ‘बीजेपी को अलग गोरखालैंड राज्य पर अपना रुख खुलकर बताना होगा। हम 15 अगस्त तक इंतजार करेंगे कि क्या प्रधानमंत्री गोरखालैंड मुद्दे पर कोई विशेष संदेश देते हैं और अगर ऐसा कुछ नहीं होगा, तो तो हम अपना अलग रास्ज़्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।‘ उन्होंने यह भी कहा कि 4 अगस्त को जीएचएम अलग राज्य की अपनी मांग के समर्थन में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक रैली आयोजित करेगा। गुरुंग ने कहा, ‘यह आंदोलन हमारी गोरखा पहचान के लिए होगा। हमें नई दिल्ली में एक ऐसी सरकार की जरूरत है जो गोरखाओं की भावनाओं को समझे।‘

राजनीतिक पर्यवेक्षक इस बयान को भाजपा के लिए चेतावनी के रूप में देखते हैं, क्योंकि भगवा खेमा 2009, 2014 और 2019 में जीजेएम के समर्थन से दार्जीलिंग में अपने उम्मीदवार को निर्वाचित कराने में कामयाब रहा। हालांकि, हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में जीजेएम सहित आठ स्थानीय पहाड़ी पार्टयिों के साथ भाजपा के गठबंधन को बड़ा झटका लगा, इसमें तृणमूल कांग्रेस समर्थति और अनित थापा द्वारा स्थापित भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) अधिकांश सीटों पर विजेता बनकर उभरी।

हालांकि, दार्जिलिंग जिले के बीजेपी अध्यक्ष कल्याण दीवान ने गुरुंग के बयान को अपरिपक्व बताया है. उन्होंने कहा, ‘अलग राज्य के मुद्दे में बहुत सारी जटिलताएं हैं और इसे मिनटों में नहीं सुलझाया जा सकता। इस पर बहुत चर्चा की जरूरत है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का कोई मतलब नहीं है।‘ हाल ही में, भाजपा को कर्सयिांग से अपनी ही पार्टी के विधायक विष्णु प्रसाद शर्मा की भी आलोचना का सामना करना पड़ा, जिन्होंने दावा किया कि राज्य में हाल ही में संपन्न पंचायत चुनावों में दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जिलों के पहाड़ी इलाकों में उनकी पार्टी और उसके सहयोगियों के खराब नतीजे बाहरी लोगों के कारण थे।

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