Last Updated: October 27, 2026

Dainik Savera Times Logo

Manipur के मुद्दे पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मिलने पहुंचा “INDIA” का डेलिगेशन

August 2, 2023

Manipur के मुद्दे पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मिलने पहुंचा “INDIA” का डेलिगेशन

नई दिल्लीः इंडियान नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस यानि इंडिया के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को मणिपुर के हालात पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। बाहर निकल कर मीडिया के सामने आए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकाजरुन खड़गे ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी संसद में बयान देने से बच रहे हैं। इंडिया के प्रतिनिधिमंडल में वे सांसद शामिल थे जिन्होंने 29 और 30 जुलाई को पूवरेत्तर राज्य का दौरा किया था। इसमें मल्लिकाजरुन खड़गे, एनसीपी नेता शरद पवार, सुदीप बंद्योपाध्याय, फारूक अब्दुल्ला, राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), डेरेक ओब्रायन, संजय सिंह, कनिमोझी, संजय राउत, राम गोपाल यादव और अन्य शामिल थे।

सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान खड़गे ने मुर्मू को बताया कि प्रधानमंत्री संसद से बच रहे हैं। वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सभी के हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंपा। सूत्र ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने राष्ट्रपति को मणिपुर में दो अलग-अलग समुदायों की दो बहादुर महिलाओं को राज्यसभा (राष्ट्रपति द्वारा नामित) में भेजने का सुझाव दिया।
इस बीच अपने ज्ञापन में, भारतीय पार्टयिों ने कहा कि मणिपुर की समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाय और तत्काल सामान्य स्थिति बहाल की जाय।

ज्ञापन में कहा गया, ‘‘मणिपुर में स्थिति गंभीर है। कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। सामने आए चौंकाने वाले वायरल वीडियो ने देश को सदमे में डाल दिया है, और यह स्पष्ट है कि राज्य प्रशासन और पुलिस मामले को तुरंत संबोधित करने में विफल रहे हैं। आरोपियों को पकड़ने में दो महीने से अधिक की देरी ने गंभीरता को और बढ़ा दिया है। यह पता चला है कई महिलाओं के खिलाफ अत्याचार हुए हैं।’’ ‘‘प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा और राज्यसभा के 21 अनुभवी और संवेदनशील संसद सदस्य शामिल थे, जिन्होंने महिलाओं और बच्चों सहित लोगों द्वारा सामना की गई तबाही और कठिनाइयों को करीब से देखा। प्रतिनिधिमंडल ने मणिपुर की राज्यपाल से भी मुलाकात कर उन्हें जमीनी हकीकत से अवगत कराया और एक ज्ञापन सौंपा।’

ज्ञापन में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि हिंसा का प्रभाव विनाशकारी रहा है, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान चली गई है, 500 से अधिक घायल हो गए और आगजनी से संबंधित घटनाओं में 5,000 से अधिक घर जल गए। 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं, जो राज्य भर के राहत शिविरों में गंभीर परिस्थितियों में रह रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने चुराचांदपुर, मोइरांग और इंफाल सहित तीन अलग-अलग संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों का दौरा किया, जहां उन्होंने लोगों से बातचीत की, उनकी चिंताओं को सुना, और विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की कठिनाइयों को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

‘‘राहत शिविरों में लोगों को भोजन और राहत सामग्री की कम उपलब्धता के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वे भय और असुरक्षा की स्थिति में रह रहे हैं, और उन्हें अपने जीवन के पुनर्नर्मिाण के लिए सुरक्षित और उचित पुनर्वास की आवश्यकता है। राज्य में तीन महीने तक चले इंटरनेट प्रतिबंध ने विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास को और बढ़ा दिया है और गलत सूचना के प्रसार को बढ़ावा दिया है।‘

इसमें कहा गया है, ‘लगभग तीन महीने से स्कूल, कॉलेज बंद हैं जिससे मणिपुर में बच्चों और युवाओं की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।‘ विपक्षी दल मणिपुर हिंसा पर संसद के दोनों सदनों में प्रधानमंत्री से विस्तृत बयान की मांग कर रहे हैं। भारत के सांसदों ने संसद में मणिपुर पर विस्तृत चर्चा की भी मांग की है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें