नई दिल्ली: भारत में सफलता के बाद दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो वैश्विक स्तर पर प्रवेश को एक विकल्प के रूप में देखती है जिसका लगातार मूल्यांकन किया जा रहा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही।‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान रिलायंस जियो के अध्यक्ष मैथ्यू ओम्मन ने कहा कि भारत अब टियर 1 प्लस देश है और देश के लिए सही नीतियां बनाने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
ओम्मन ने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि भारत से वैश्विक जाने के बड़े अवसर हैं। रिलायंस उन अवसरों को तलाशने के लिए विकल्पों की समीक्षा करना जारी रखेगी कि विश्वस्तर पर भारत का सर्वोत्तम प्रतिनिधित्व कैसे किया जाए और प्रौद्योगिकी क्षमताओं का लाभ उठाकर ग्राहकों का अनुभव कैसे बेहतर किया जाए, जैसा कि हम अभी तक भारत में कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि वास्तव में डिजिटल इंडिया दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को न केवल मोबाइल टावर स्थापित करने के लिए, बल्कि लोगों के वास्ते उपकरणों तथा सेवाओं को किफायती व सुलभ बनाने के लिए 75,700 करोड़ रुपये के यूनिवर्सल र्सिवसेज ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओएफ) का लाभ उठाना शुरू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जियो भारत फोन पारिस्थितिकी तंत्र को 2जी मुक्त भारत और एआई (कृत्रिम मेधा) युक्त भारत बनाने में सक्षम है। ओम्मन ने कहा कि अभी तक इस्तेमाल नहीं किए गए यूएसओ कोष का उपयोग न केवल दूरसंचार बुनियादी ढांचे के लिए किया जाना चाहिए, बल्कि इससे उन लोगों की सहायता की जानी चाहिए जो इस बदलाव का खर्च वहन नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा, ‘‘जो कोई भी संपर्क या मासिक किराया वहन नहीं कर सकता, उसे इस कोष से उपकरण और सेवा मॉडल दिया जाना चाहिए।’’ओम्मन ने साथ ही कहा कि यूएसओएफ के लिए पांच प्रतिशत संग्रह को हटाया जाना चाहिए और लाइसेंस शुल्क को घटाकर तीन प्रतिशत किया जाना चाहिए। वहीं मोबाइल नेटवर्क और उपग्रहों के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन पद्धति समान होनी चाहिए।
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