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CM मनोहर लाल की अध्यक्षता में हरियाणा राज्य सूखा राहत और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 55वीं बैठक का आयोजन

October 31, 2023

CM मनोहर लाल की अध्यक्षता में हरियाणा राज्य सूखा राहत और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 55वीं बैठक का आयोजन

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हरियाणा राज्य सूखा राहत और बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 55वीं बैठक के दौरान राज्य में बाढ़ नियंत्रण उपायों को और मजबूत करने के उद्देश्य से 604 नई बाढ़ नियंत्रण योजनाओं को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें से अधिकांश योजनाएं मुख्य रूप से आबादी की सुरक्षा, कृषि भूमि की सुरक्षा, बाढ़ पानी निकासी की मशीनरी की खरीद, कृषि भूमि का सुधार, पानी का संरक्षण और पुनः उपयोग तथा नदी नालों के सुचारू प्रवाह के लिए संरचनाओं के नवीकरण या पुनर्निर्माण पर केंद्रित हैं।

बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री दुष्यन्त चैाटाला और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जेपी दलाल भी मौजूद रहे। स्वीकृत नई बाढ़ योजनाओं में यमुनानगर के लिए 77, सोनीपत के लिए 42, झज्जर के लिए 67, रोहतक के लिए 36, अंबाला के लिए 53, कैथल के लिए 43, कुरूक्षेत्र के लिए 31, हिसार के लिए 16, चरखी दादरी के लिए 22, फतेहाबाद के लिए 27, करनाल के लिए 20, जींद के लिए 28, पानीपत के लिए 17, भिवानी के लिए 15, नूंह के लिए 18, महेंद्रगढ़ और फरीदाबाद के लिए 5-5, पलवल के लिए 14, पंचकूला के लिए 42, सिरसा के लिए 10 और रेवाड़ी और गुरुग्राम के लिए 3-3 योजनाएं शामिल हैं।

बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया कि वे बाढ़ के खतरे को कम करने हेतु बांध निर्माण के लिए अपने-अपने जिलों के स्थानीय लोगों से मांग पत्र लें। इसके अलावा, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विभाग मानसून के मौसम के दौरान बाढ़ को रोकने के लिए नहरों या नालों में न्यूनतम जल प्रवाह क्षमता निर्धारित करें। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य इन जल निकायों में गाद और जल प्रवाह के प्रबंधन में सुधार करना है।

मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी बाढ़ नियंत्रण योजनाओं का शीघ्र कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने जल संरक्षण को प्राथमिकता देने और वर्षा जल के पुनः उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया। इससे न केवल बाढ़ प्रबंधन उपयों को मजबूती मिलेगी बल्कि भूजल पुनर्भरण और शुष्क क्षेत्रों में जल संसाधनों के कुशल उपयोग में भी सहयोग मिलेगा, जिससे स्थायी जल प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा मिलेगा।

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