Last Updated: September 23, 2026

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जानिए रमा एकादशी व्रत कथा और उसके महत्व के बारे में

November 6, 2023

जानिए रमा एकादशी व्रत कथा और उसके महत्व के बारे में

पौराणकि युग में मुचुकंद नामक प्रतापी राजा थे, उनके एक सुंदर कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। इनका विवाह राजा चंद्रसेन के बेटे शोभन के साथ हुआ था। शोभन शारीरिक रूप से अत्यंत दुर्बल था। वह एक समय भी बिना अन्न के नहीं रह सकता था। एक बार दोनों मुचुकंद राजा के राज्य में गए उसी दौरान रमा एकादशी व्रत की तिथि थी। चंद्रभागा को यह सुन चिंता हो गई क्योंकि उसके पिता के राज्य में एकादशी के दिन पशु भी अन्न, घास आदि नहीं खा सकते, तो मनुष्य की बात ही अलग है।

उसने अपने पति शोभन से कहा अगर आपको कुछ खाना है तो इस अलग राज्य दूर किसी अन्य राज्य में जाकर भोजन ग्रहण करना होगा। पूरी बात सुनकर शोभन ने निर्णय लिया कि वह रमा एकादशी का व्रत करेंगे, इसके बाद ईश्वर पर छोड़ देंगे। एकादशी का व्रत प्रारंभ हुआ, व्रत होते-होते रात बीत गई लेकिन अगले सूर्योदय तक शोभन के प्राण नहीं बचे। उसकी पत्नी चंद्रभागा पति की मृत्यु के बाद अपने पिता के घर रहने लगी उसने अपना पूरा मन पूजा पाठ में लगाया और विधि के साथ एकादशी का व्रत किया।

दूसरी तरफ शोभन को एकादशी व्रत करने का पुण्य मिलता है और वो मरने के बाद देवपुर का राजा बनता है जिसमें असीमति धन और ऐश्वर्य हैं एक दिन सोम शर्मा नामक ब्राह्मण देवपुर के पास से गुजरता है और शोभन को देख पहचान लेता है और पूछता है कि शोभन को यह सब ऐश्वर्य कैसे प्राप्त हुआ। तब शोभन उसे बताता है कि यह सब रमा एकादशी का प्रताप है लेकिन यह सब अस्थिर है कृपा कर मुझे इसका स्थिर उपाय बताएं शोभन की पूरी बात सुन सोम शर्मा उससे विदा लेकर शोभन की पत्नी से मिलने जाते हैं और शोभन के देवपुर का सत्य बताते हैं चंद्रभागा यह सुन बहुत खुश होती है और सोम शर्मा से कहती है कि आप मुझे अपने पति से भेंट करवा दो, इससे आपको भी पुण्य मिलेगा।

फिर सोम शर्मा उसे बताते हैं कि यह सब ऐश्वर्य अस्थिर है, तब चंद्रभागा कहती है कि वो अपने पुण्यों से इस सब को स्थिर कर देगी। तब सोम शर्मा अपने मंत्रों एवं ज्ञान के द्वारा चंद्रभागा को दिव्य बनाते हैं और शोभन के पास भेजते हैं। शोभन पत्नी को देख बहुत खुश होता है। तब चंद्रभागा उससे कहती है कि मैंने पिछले 8 वर्षों से नियमति ग्यारस का व्रत किया है मेरे उन सब जीवन भर के पुण्यों का फल मैं आपको अर्पित करती हूं। उसके ऐसा करते ही देव नगरी का ऐश्वर्य स्थिर हो जाता है और फिर सभी आनंद से रहने लगते हैं। इस प्रकार रमा एकादशी का महत्व पुराणों में बताया गया है। इसके पालन से जीवन पापमुक्त होता है।

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