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प्याज निर्यात पर प्रतिबंध : किसानों से Sharad Pawar ने कहा, जब तक आप सड़कों पर नहीं उतरेंगे, सरकार नहीं सुनेगी

December 11, 2023

प्याज निर्यात पर प्रतिबंध : किसानों से Sharad Pawar ने कहा, जब तक आप सड़कों पर नहीं उतरेंगे, सरकार नहीं सुनेगी

नासिकः प्याज उत्पादकों के हित में चार साल बाद फिर से सार्वजनिक आंदोलन शुरू करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि जब तक आप सड़क पर नहीं उतरेंगे, सरकार नहीं सुनेगी। उन्होंने प्याज निर्यात पर केंद्र के प्रतिबंध को रद्द करने की मांग की। पवार, राज्य में प्याज उगाने वाले केंद्रों में से एक, नासिक के चंदवाड गए और एक विरोध मार्च में शामिल हुए, यहां मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क जाम किया और सरकार विरोधी नारे लगाने वाले किसानों के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। पवार ने आलोचना की, ’केंद्र के प्याज निर्यात पर प्रतिबंध के बाद देश में इसकी कीमतें गिर गई हैं.. इससे किसान समुदाय में गुस्सा है। सरकार की नीतियों के कारण किसानों को उनकी मेहनत का मूल्य नहीं मिल पा रहा है।’

मराठा नेता ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्पष्ट किया, ’हमें इस तरह के आंदोलन करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जब तक आप सड़कों पर नहीं उतरेंगे, सरकार आपकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देगी।’ पवार ने याद किया कि जब वह (मई 2004-मई 2014 तक) कृषि मंत्री थे, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया था कि प्याज की कीमतें गिरने नहीं दी जाएंगी, लेकिन वर्तमान सरकार ऐसा करने में सक्षम नहीं है। इसकी बजाय, उन्होंने सरकार पर मार्च 2024 तक प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर किसानों का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया, जिससे बाजारों में कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और उत्पादकों के लिए बर्बादी हुई।

पवार ने घोषणा की, ’यह प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए.. सरकार को प्याज के निर्यात में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। आज का आंदोलन किसानों की दुर्दशा के प्रति केंद्र की आंखें खोल देगा और वे निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।’ कृषि संबंधी अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हुए राकांपा सुप्रीमो ने कहा कि नवंबर में नासिक में भारी बारिश/ओलावृष्टि हुई थी, जिससे अंगूर के बागों को गंभीर नुकसान पहुंचा था। नासिक के अंगूर की खपत पूरे देश में होती है और अब बांग्लादेश ने अंगूर पर भारी शुल्क लगा दिया है, जिससे यहां के किसानों पर फिर से बुरा असर पड़ा है।

इसी तरह, भारत में चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है और गन्ने के रस का एक उप-उत्पाद इथेनॉल है, लेकिन पिछले सप्ताह केंद्र ने गन्ने के रस से इथेनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो गन्ना किसानों के लिए हानिकारक साबित हुआ है।पवार ने कहा, कि ‘किसानों के हित में कभी फैसले नहीं लिए जाते.. सरकार को आज के विरोध-प्रदर्शन का संदेश समझना चाहिए.. कल मैं नई दिल्ली में संसद जाऊंगा और संबंधित लोगों से मिलूंगा।‘

आज दोपहर की शुरुआत में, जब पुलिस ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी, तो पवार, कई पार्टी नेताओं के साथ, हजारों स्थानीय किसानों के विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। नासिक और अन्य हिस्सों में किसान निर्यात प्रतिबंध को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले कुछ महीने से एपीएमसी में हड़ताल के साथ नियमित विरोध-आंदोलन कर रहे हैं। चार साल में यह पहली बार है कि राज्यसभा सदस्य पवार ने किसी आम सार्वजनिक मुद्दे के लिए सीधे आंदोलन में भाग लिया।

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