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संगम तट पर दिखा साइबेरियन पक्षियों का भव्य नजारा, तस्वीरें हो रही वायरल

January 16, 2024

संगम तट पर दिखा साइबेरियन पक्षियों का भव्य नजारा, तस्वीरें हो रही वायरल

प्रयागराज: दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मेले के दौरान गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी तट पर संयम, श्रद्धा एवं कायाशोधन का कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए साइबेरियन पक्षियों का जमावड़ा शुरू हो गया है। माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के हवन, पूजन, साधु-संतों के प्रवचन से जिस प्रकार पूरे मेला क्षेत्र में आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहता है उसी प्रकार दूर देश से प्रयागराज पहुंचे साइबेरियन पक्षियों के संगम के जल में कलरव और अठखेलियों से तट गुलजार हो गया है। ऐसा लगता है कल्पवासियों की तरह साइबेरियन पक्षियों का भी एक मास का कल्पवास शुरू होगा।

देश के कोने-कोने से संगम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही ये साइबेरियन पर्यटक भी हजारों मील से उड़कर यहां पहुंचे हैं। संगम के जल पर विदेशी मेहमानों के कलरव और अठखेलियों को देखकर पर्यटक एवं श्रद्धालु आनन्द की अनुभूति महसूस करते हैं। इनके पहुंचने से संगम तट के सौंदर्य में और भी निखार आया है। तट पर सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। शाम ढ़लते यहां का नजारा और भी रमणीय हो जाता है। सात समंदर पार से आने वाले साइबेरियन पक्षियों को घाटों पर देखकर सैलानियों को सुकून मिलता है।

प्रयाग धर्म संघ के अध्यक्ष और तीर्थ पुरोहित राजेन्द्र पालीवाल ने बताया कि पिछले शनिवार को संगम में नगर विकास मंत्री ए के शर्मा ने भी साइबेरिया पक्षियों के साथ आनंद के कुछ पल बिताए। उन्होंने अपने हाथो से चुगने के लिए कुछ बेसन से बने सेव और चावल की लाई संगम में प्रवाहित किया जिसे देखकर इन पक्षियों का झुण्ड एक साथ आवाज निकालते हुए टूट पड़े।

श्री शर्मा यहां माघ मेला और आगामी वर्ष में लगने वाले कुंभ की तैयािरयों का अवलोकन करने पहुंचे थे। उन्होंने मेला प्राधिकरण में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद संगम का तुत्फ उठाया। उन्होंने विदेशी पक्षियों को अपने हाथो से दाना चुगाया। श्री पालीवाल ने बताया कि आवाज लगाकर सेव को अपनी हथेली पर रख कर इन पक्षियों को चुगाने का अपना अलग ही आनंद मिलता है। हथेली पर उड़कर चोंच से जब सेव उठाती हें तब इनके पंखों में लगे संगम का जल चेहरे पर जब पडता है उस एहसास का वर्णन नही किया जा सकता।

उन्होंने बताया कि हिन्दी साहित्य के महान सन्त कवि और रामचरितमानस गौरव ग्रन्थ के रचयिता स्वामी तुलसी दास ने बालकाण्ड में लिखा है “माघ मकरगति रवि जब होई, तीरथ पतिहिं आव सब कोई देव, दनुज, किन्नर, नर श्रेनी, सागर मज्जहिं सकल त्रिवेणी। माना जाता है माघ मास में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश समेत आदित्य, रूद्रण एवं अन्य सभी देवी-देवता माघ मास में संगम स्नान करते हैं। जिनका सौभाग्य होता है वही माघ मास में त्रिवेणी स्नान का पुण्य पाता है चाहे वह मनुष्य हो या पशु-पक्षी।

माघ मेले से पहले गुलाबी ठण्ड शुरू होते ही साइबेरियन पक्षी यहां क्रीड़ा करते हुए बिताते हैं और गर्मी शुरू होते ही अपने वतन को लौटना शुरू कर देते हैं। ये विदेशी मेहमान स्वीटजरलैंड, साइबेरिया, जापान और रूस समेत विश्व के अन्य ठंडे देशों से सर्दियों में संगम की ओर कूच करते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले अपने वतन लौट जाते हैं।

उन्होने बताया कि संगम के जल पर इनका तैरना और पंख फड़फडाना यहां पहुंचने वाले कल्पवासियों, श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों को लुभाता है। सफेद, काले रंग मिश्रण वाली चिडियां संगम के जल पर अठखेलियां करती मिलती हैं। यह इंसानों से बिल्कुल नहीं डरतीं। नाव सं संगम विचरण करने वाले सैलानी हाथ पर बेसन के सेव चुगाते हैं। जल में सेव फेंकने के बाद एक साथ बड़ी संख्या में पक्षियों का झुण्ड पानी पर टूट पड़ता है।

तीर्थ पुरोहित पालीवाल ने बताया कि एक तरफ ये पक्षी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ अपनी खूबसूरती से संगम की शोभा बढ़ा रहे हैं। लोग घंटों घाट पर बैठकर संगम में अठखेलियां करते इन पक्षियों को निहारते रहते हैं। इतना ही नहीं लोग इनकी मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। कोई इन्हें बेसन से बनी सेव तो कोई पपड़ी खिलाता है तो वहीं ये पक्षी उनके स्वागत को स्वीकार कर बहुत चाव से खाते हैं।

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