Last Updated: October 6, 2026

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भारत का सबसे बड़ा गैस आयात सौदा, कतर से सालाना 75 लाख टन एलएनजी खरीद का अनुबंध

February 12, 2024

भारत का सबसे बड़ा गैस आयात सौदा, कतर से सालाना 75 लाख टन एलएनजी खरीद का अनुबंध

नई दिल्ली: पैट्रोनैट द्वारा 2029 से 20 साल के लिए कतर से सालाना 75 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) खरीद अनुबंध का नवीकरण संभवत: दुनिया में इस ईंधन की खरीद का सबसे बड़ा सौदा है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने यह बात कही है। पैट्रोनैट के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि मूल 25-वर्षीय समझौते पर 1999 में हस्ताक्षर किए गए थे और इसमें आपूíत 2004 में शुरू हुई थी।

तब से कतर ने कभी एक भी खेप में चूक नहीं की है और न ही उसने दाम काफी ऊंचे होने के दौरान भारतीय कंपनी द्वारा आपूíत नहीं लेने की वजह से ‘खरीदों या भुगतान करो’ प्रावधान के तहत कोई जुर्माना लगाया है। विस्तारित अनुबंध के तहत आपूíत पैट्रोनैट द्वारा उन 52 खेप (कार्गो) की डिलीवरी लेने के बाद शुरू होगी जो वह 2015-16 में कीमतों में उछाल की वजह से लेने में विफल रही थी।

हालांकि, अनुबंध की मात्र कभी नहीं बदली है, लेकिन कीमत में चार बार बदलाव हुआ है। इसमें ताजा मामला भी शामिल है, जिसमें अनुबंध विस्तार पर नए सिरे से बातचीत हुई है। इसके अलावा जिस गैस की आपूíत का वादा किया गया था उसकी संरचना भी बदल गई है। रासगैस (अब कतरएनर्जी) ने मूल रूप से ईथेन और प्रोपेन तत्वों वाली रिच गैस की आपूíत के लिए अनुबंध किया था, जिसका इस्तेमाल पैट्रोरसायन परिसरों में किया जाता है।

इसने सालाना 50 लाख टन (एमटी) एलएनजी की आपूíत की है जिसमें मीथेन (बिजली उत्पादन, उर्वरक बनाने, सीएनजी या खाना पकाने के ईंधन के उत्पादन के लिए इस्तेमाल होता है) के साथ-साथ ईथेन और प्रोपेन युक्त गैस की आपूíत शामिल है। पिछले सप्ताह हुए संशोधित अनुबंध के तहत दाम कम है। इसमें कतर एनर्जी इथेन और प्रोपेन रहित लीन या गैस की आपूíत करेगी। हालांकि, पैट्रोनेट के अधिकारियों ने कहा कि कतर तबतक रिच गैस की आपूíत जारी रखेगा जबतक उनके पास ईथेन और प्रोपेन का उपयोग करने की सुविधा नहीं है।

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