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अनुसंधान के लिए बीजों की उन्नत और कुशल डिलीवरी के लिए डीबीटी-विशेषीकृत प्लेटफार्म का हुआ उद्घाटन

March 11, 2024

अनुसंधान के लिए बीजों की उन्नत और कुशल डिलीवरी के लिए डीबीटी-विशेषीकृत प्लेटफार्म का हुआ उद्घाटन

माननीय डॉ. जितेंद्र सिंह, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने 11 मार्च 2024 को नावी, मोहाली में डीबीटी स्पीडी सीड्स फैसिलिटी का उद्घाटन किया है।

डीबीटी स्पीडी सीड्स फैसिलिटी के बारे स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी उन्नत किस्मों के विकास में तेजी लाकर फसल सुधार कार्यक्रमों में ट्रांस्फ़ॉर्मेशनल भदनाव करने की फैसिलिटी प्रदान करेगी जो आबादी की खाद्य एवं पोषण संबंधी मांग को बनाए रख सकती है और इसमें योगदान कर सकती है। यह फैसिलिटी भारत में कृषि और जैवप्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास में लगे सरकारी संस्थानों, निजी संस्थानों और अग्रणीय उद्योगों के वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं को फसल की किस्मों को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

मीडिया से बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बढ़ती आबादी, घटती कृषि योग्य भूमि और लगातार प्रतिकूल जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा एक चुनौतीपूर्ण कार्य बनता जा रहा है। विकसित भारत’ मिशन के तहत 2047 तक पौष्टिक भोजन की मांग को पूरा करना आवश्यक है। अजैविक और जैविक तनाव सहित कई कारक, उपज हानि का कारण बनते हैं और खाद्य उपज की पोषण गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। प्रमुख चुनौतियों में से एक पारंपरिक ब्रीडिंग दृष्टिकोण के माध्यम से विविधता विकसित करने में लगने वाला लंबा समय (10 वर्ष से अधिक) है। नैशनल स्पीड ब्रीडिंग प्लेटफ़ॉर्म और स्पीड ब्रीडिंग प्रोटोकॉल के विकास में विभिन्न प्रकार के विकास और विभिन्न सुधार कार्यक्रमों में कई गुना तेजी आएगी। अब, एक वर्ष के भीतर एक फसल की कई जनरेशन प्राप्त संभव है, जिससे कृषि वैज्ञानिकों/ब्रिडर्स को कम समय (जैसे 5 वर्ष) के भीतर एक किस्म विकसित करने की अनुमति मिलती है। इस युग में, स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी जीन एडिटिंग और मार्कर-अस्सिटेड ब्रीडिंग द्वारा बने जर्मप्लाज्म के लिए फसल कटाई के समय को तेजी से कम करके एक परिवर्तनकारी बदलाव ला सकती हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म उज्च श्रूयुट फेनोटाइपिंग में भी सहायता करेगा। स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी का उपयोग सटीक नियंत्रित वातावरण (विशेष रूप से हल्के रंग और प्रकाश की तीव्रता, आर्द्रता, तापमान) का उपयोग करके गेहूं, चावल, सोयाबीन, मटर, टमाटर आदि की नई किस्मों को विकसित करने के लिए किया जाएगा।

यह फैसिलिटी बायोटेक-किशन का हिस्सा बन सकती है क्योंकि पंजाब और पड़ोसी राज्यों जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में कई प्रगतिशील किसान अपनी किस्मों और भूमि प्रजातियों की पोषण गुणवत्ता में सुधार में रुचि रखते हैं। यह फैसिलिटी भारत के राष्ट्रीय मिशन पोषण अभियान’ में भी योगदान देगी।

प्रोफेसर अश्वनी पारीक, कार्यकारी निदेशक, नाची ने कहा कि नाबी प्रतिकूल जलवायु परिवर्तन और सीमित जल एवं भूमि संसाधनों के अंतर्गत फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान का एक अग्रणी केंद्र है। प्रो. पारीक ने सभा को अवगत कराया कि संस्थान द्वितीय कृषि के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है और मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित कर रहा है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि ब्रीडिंग फैसिलिटी प्रति वर्ष एक फसल की चार जनरेशन तक प्राप्त करने के लिए सटीक नियंत्रित बातावरण का उपयोग करके गेहूं, चावल, सोयाबीन, मटर, टमाटर, सरसों आदि जैमी नई किस्मों के विकास में मदद करेगी।

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