Last Updated: October 17, 2026

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ISRO इसी महिने कर सकता है मानव रहित गगनयान मिशन का द्वितीय परीक्षण

April 18, 2024

ISRO इसी महिने कर सकता है मानव रहित गगनयान मिशन का द्वितीय परीक्षण

चेन्नई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अगले सप्ताह अपने गगनयान मिशन के तहत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अंतरिक्ष एजेंसी ने घोषणा की कि 2024 भारत के प्रतिष्ठित पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान का वर्ष होगा। एजेंसी ने कहा कि वह अगले सप्ताह द्वितीय मानव रहित मिशन, एक परीक्षण वाहन उड़ान मिशन और एक एयरड्रॉप का परीक्षण करेगी।
मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक, इसरो चेयरमैन ने बुधवार को अहमदाबाद में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी आफ इंडिया (एएसआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर कहा, ‘एयरड्रॉप परीक्षण 24 अप्रैल को होगा।’ इस परीक्षण के बाद दो और मानव रहित मिशन होंगे, जो अगले वर्ष होंगे। उन्होंने कहा,‘‘अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले साल के अंत तक मानवयुक्त मिशन को अंजाम दिया जाएगा।‘‘ तृतीय चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की सफलता से उत्साहित (जब भारत चंद्रमा के अब तक अज्ञात दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश बन गया और पहला सूर्य मिशन आदित्य-एल1 जो लैग्रेंज प्वाइंट (एल1) की हेलो कक्षा में पहुंचा। सबसे गर्म ग्रह के बाहरी वातावरण का व्यापक अध्ययन करने के लिए) इसरो गगनयान मिशन की द्वितीय परीक्षण उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है।

इसरो ने कहा कि उसके सौर वेधशाला अंतरिक्ष यान, आदित्य-एल1 का हेलो-ऑर्बिट इंसर्शन (एचओआई) 06 जनवरी, 2024 को पूरा किया गया था। आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान की कक्षा एक आवधिक हेलो कक्षा है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर (लगभग 177.86 पृथ्वी दिवस की परिक्रमा अवधि के साथ निरंतर गतिशील सूर्य-पृथ्वी रेखा) दूर स्थित है। यह हेलो कक्षा एल-1 पर एक आवधिक, त्रि-आयामी कक्षा है जिसमें सूर्य, पृथ्वी और एक अंतरिक्ष यान शामिल है। इस विशिष्ट प्रभामंडल कक्षा को पांच वर्षों के मिशन जीवनकाल को सुनिश्चित करने, स्टेशन-कीपिंग युद्धाभ्यास को कम करने और इस प्रकार ईंधन की खपत को कम करने और सूर्य के निरंतर, अबाधित दृश्य को सुनिश्चित करने के लिए चुना गया है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर, 2023 में, इसरो ने नए विकसित परीक्षण वाहन के साथ मैक संख्या 1.2 पर क्रू एस्केप सिस्टम (सीईएस) का इन-फ्लाइट एबॉर्ट प्रदर्शन सफलतापूर्वक आयोजित किया, जिसके बाद क्रू मॉड्यूल पृथक्करण और सुरक्षित पुर्नाप्राप्ति हुई थी।

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