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बड़ा मंगल उत्सव के लिए तैयार लखनऊ, हो रहे खास इंतजाम, 18 जून तक चलेगा आयोजन

May 24, 2024

बड़ा मंगल उत्सव के लिए तैयार लखनऊ, हो रहे खास इंतजाम, 18 जून तक चलेगा आयोजन

लखनऊ। लखनऊ में 28 मई से बड़ा मंगल उत्सव की शुरुआत होगी, जो लगभग एक महीने तक चलेगा। यह यूपी की राजधानी का एक खास उत्सव है। यह त्योहार इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब आम चुनाव हो रहे हैं। हिंदी महीना ज्येष्ठ में मंगलवार, हिंदू देवता, भगवान हनुमान को समर्पित है और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक भी है। शहर की पुलिस यातायात की समस्या से निपटने के लिए योजना बना रही है, वहीं लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) ने उत्सव को जीरो-वेस्ट इवेंट बनाने का संकल्प लिया है। लखनऊ नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने कहा, ‘पिछले साल की तरह, भंडारों (सामुदायिक भोज) के आयोजन से पहले उनका पंजीकरण अनिवार्य होगा। ‘बड़ा मंगल 28 मई से शुरू होकर 18 जून तक चलेगा।

सिंह ने कहा, ‘हम गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग कर रहे हैं और यह योजना बनाने के लिए एक बैठक आयोजित की जा रही है कि उत्सव के दौरान जीरो वेस्ट कैसे हो। ‘पिछले साल भंडारा आयोजित करने वालों के लिए पहले से पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया था। आयोजकों ने एलएमसी पोर्टल, लखनऊ वन ऐप पर या एलएमसी द्वारा संचालित नियंत्रण कक्ष – 1533 पर कॉल कर पंजीकरण कराया।

आयुक्त ने जोर देकर कहा, ‘इस साल भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, लेकिन इस बार शून्य अपशिष्ट पर जोर दिया जाएगा। ‘पंजीकरण एक अपेक्षाकृत सरल प्रक्रिया है जिसमें फॉर्म भरने के लिए पुलिस की वेबसाइट पर जाना है।

पंजीकरण के समय नाम, संख्या और खिलाए जाने वाले लोगों की अनुमानित संख्या जैसे विवरण सौंपने होंगे। पंजीकरण आवश्यक हो जाता है ताकि एलएमसी द्वारा कचरा संग्रहण पृथक्करण और निपटान के लिए वाहन और दूसरी सुविधाएं प्रदान की जा सके ताकि शहर को साफ सुथरा रखा जाय।

बड़ा मंगल के दौरान, खासकर हर मंगलवार (और अक्सर शनिवार को भी) लोगों को होने वाली ट्रैफिक समस्या को देखते हुए, लखनऊ ट्रैफिक पुलिस एक योजना का मसौदा तैयार कर रही है। पुलिस उपायुक्त (केंद्रीय) रवीना त्यागी ने कहा, ’जनता की सुविधा के लिए ट्रैफिक प्लान बनाया जा रहा है। हम इस हफ्ते के अंत तक योजनाएं लागू कर देंगे।’

बड़ा मंगल के त्योहार का एक दिलचस्प इतिहास है। यह त्योहार लखनऊ की गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है और कहा जाता है कि इसकी शुरुआत लगभग 400 साल पहले मुगल शासन के दौरान हुई थी।

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