Last Updated: September 23, 2026

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चीन में तकनीक के जरिए जीवन स्तर में सुधार 

July 19, 2024

चीन में तकनीक के जरिए जीवन स्तर में सुधार 

चीन की आज जो आर्थिक स्थिति है, उसकी कहानी शुरू होती है तीन दशक पहले… 29 मार्च, 1993 को चीन ने अपनी आर्थिक प्रणाली के तौर पर समाजवादी बाजार अर्थव्यवस्थाको स्वीकार किया था। चीन के राजनीतिक और आर्थिक इतिहास में यह बड़ा बदलाव था। बेशक चीन ने आर्थिक सुधारों की शुरूआत 1978 में की थी, लेकिन इसी संशोधन के बाद उसने बाजारवादी आर्थिकी की ओर तेजी से अपने कदम बढ़ाने शुरू किए। विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने की पटकथा इसी संशोधन के बाद लिखी गई और चीन साल 2001 में इसका सदस्य बन गया। इसी के बाद चीन में निजी संपत्ति रखने के अधिकार को मान्यता मिली। इसके साथ ही चीन दुनिया से कदमताल करते हुए तेजी से अपना आर्थिक विकास करने लगा। इसका असर तीन दशकों बाद दिख रहा है, जब चीन वैश्विक व्यापार और आर्थिक क्रांति का प्रमुख देश है। आज अगर वैश्विक स्तर पर दुनिया के पहला नंबर का निर्यातक देश चीन है तो इसकी भी कहानी इसके बदलाव के बाद उठाए गए कदमों से ही शुरू होती है। 

इस बीच एक और क्रांति चीन में हुई है। उसने तकनीक के जरिए अपने लोगों का जीवन स्तर सुधार दिया है। अब चीन में तकनीक खेती-किसानी से लेकर घरेलू उपयोग तक में अपनी हाजिरी दिखा रही है। खेती-किसानी में तकनीक के बढ़ते असर का ही प्रतीक है कि चीन के सकल घरेलू उत्पाद में खेती की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत है। लेकिन उसमें मानव श्रम वैसा नहीं लगा है, लेकिन उद्योग का सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी 46 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसकी वजह तकनीक का विस्तार है। 

चीन में तकनीकी विस्तार की वजह वहां की साक्षरता भी है। चीन में साक्षरता 91 प्रतिशत है। इसके साथ ही चीन ने करीब डेढ़ दशक में उच्च शिक्षा के विकास में बड़ा काम किया है। आज दुनिया में चीन केवै औपचारिक प्रौद्योगिकी-लाइसेंसिंग समझौतों के माध्यम से विदेशी ज्ञान को लाइसेंस देने में भी चीन बहुत आक्रामक रहा है। चीनी रॉयल्टी और शुल्क भुगतान में कई देशों से काफी आगे है। चीन ने अपने अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययन पर इतना निवेश किया है कि अब चीन में अनुसंधान एवं विकास में जुटे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की संख्या अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। तकनीक के विस्तार और उपयोग से चीन में उच्च मूल्य वाली सेवाएं तेजी बढ़ीं है।

तकनीक के जरिए चीन हेल्थ सेक्टर में भी हस्तक्षेप कर रहा है। यहां की हाईड्रोजन तकनीक के जरिए लोग युवा दिख रहे हैं। चीनी शोधकर्ताओं ने इस थेरेपी का विकास किया है, जिसका उपयोग इंसान के शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने और बुढ़ापे संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए किया जा सकता है। इस तकनीक के मूल में नैनोटेक्नोलॉजी है। 

करीब एक दशक में, चीन ने कंप्यूटर, स्मार्टफोन, आधुनिक मेट्रो, सब वे और हाई-स्पीड रेल को उपभोक्ता केंद्रित बना दिया है। आज स्मार्ट और स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली, स्वचालित ड्राइविंग कार, नए ऊर्जा वाहन, स्वचालित मशीनें और रोबोट, उन्नत चिकित्सा उपकरण और दवाएं आदि की तकनीक का चीन ने ना सिर्फ विस्तार किया है, बल्कि इसका फायदा उसके नागरिकों को मिल रहा है। 

मोटे तौर पर कह सकते हैं कि बदलते दौर में तकनीक के चलते ना सिर्फ चीन की आर्थिक कमाई बढ़ी है, लोगों को रोजगार मिला है, बल्कि उनकी अपनी जिंदगी आसान हुई है। तकनीक इस तरह से दो तरफा हस्तक्षेप कर रही है। एक तरफ वह जहां चीन के लोगों की जिंदगी बदल रही है, वहीं चीन द्वारा इन्हें कमोडिटी बनाए जाने के चलते तकनीक दूसरे देशों को सस्ती मिल रही है। जिसकी वजह से दूसरे देशों के नागरिक भी इसका फायदा उठा रहे हैं। बशर्तें कि उनकी राष्ट्रीय नीतियों ने उन तकनीकों को अपनाने की मंजूरी दी है। 

यह तकनीकी क्रांति का ही कमाल कहा जाएगा कि चीन में पिछले करीब एक दशक में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले अंतिम 98.99 मिलियन गरीब ग्रामीण निवासियों को गरीबी से बाहर निकाल दिया गया है। इसके साथ ही देश के सभी 832 गरीब काउंटियों और 128,000 गांवों को गरीबी की सूची से हटा दिया गया।

(लेखक—उमेश चतुर्वेदी)

 

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