
नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा प्रीमियम पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने के निर्णय पर विपक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए बुधवार को सवाल किया कि क्या विपक्षी दलों ने अपने-अपने शासन वाले राज्यों के वित्त मंत्रियों को इस संबंध में कोई पत्र लिखा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2024 (2) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बीमा प्रीमियम पर राज्यों द्वारा कर लगाए जाने की व्यवस्था जीएसटी से पहले से चली आ रही है और वही व्यवस्था जीएसटी में समाहित की गई है। उन्होंने कहा कि वह संसद में विपक्ष द्वारा इस विषय में कही गई बातों को जीएसटी परिषद के सामने रखेंगी, क्योंकि परिषद अपनी 31वीं, 37वीं और उसके बाद हुई अपनी बैठकों में इसको लेकर चर्चा कर चुकी है।
जीवन और स्वास्थ्य बीमा पालिसी के नियम पर जीएसटी हटाने के मुद्दे पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री की चिट्ठी को लेकर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि विपक्ष इस पर राजनीति कर रहा है। मंत्री दूसरों के ज्ञापनों पर इस तरह के पत्र लिखते रहते हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी से पहले हर राज्य में स्वास्थ्य कर लगाया जाता था। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेंकता है। उन्होंने सवाल किया कि यदि इस तरह की मांग है तो क्या विपक्ष ने अपने राज्यों के वित्त मंत्रियों को पत्र लिखे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी परिषद की 31, 37 तथा अन्य कई बैठकों में चर्चा हुई है। उन्होंने एक अखबार की इस खबर को गलत बताया कि स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के 24 हजार 539 करोड़ रुपए केंद्र ने अपनी जेब में रख लिये हैं। उन्होंने कहा कि बीमा प्रीमियम पर जीएसटी का नौ प्रतिशत केंद्र और इतना ही प्रतिशत राज्यों को चला जाता है। उन्होंने कहा ,“ मैं जीएसटी परिषद को रिपोर्ट करूंगी कि संसद में इस विषय पर क्या हुआ।”
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