नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दने के लिये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और जमानत याचिका भी दायर की है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पहले गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया था और उन्हें निचली अदालत से जमानत लेने की सलाह दी थी। केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने स्पष्ट किया है कि, दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में उनके पद का सम्मान करते हुए, पुलिस ने घबराहट और सावधानी के साथ कदम उठाया और आरोपी होने के संदेह वाले अन्य व्यक्तियों से सबूत इकट्ठा करना शुरू किया। नतीजतन, कई लोगों से जुड़ी साजिश के पूरे जाल का पता लगाने के लिए पूरे देश में व्यापक जांच की गई।
दिल्ली उच्च न्यायालय में अपनी याचिका में, सीएम केजरीवाल ने कहा कि वह एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी (आम आदमी पार्टी) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें “पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण और बाहरी विचारों के लिए घोर उत्पीड़न और उत्पीड़न” का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने आगे बताया है कि डेढ़ साल की अवधि में याचिकाकर्ता के खिलाफ पर्याप्त सामग्री एकत्र करने के बाद ही उन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी, जो 23 अप्रैल, 2024 को दी गई। एफआईआर दर्ज होने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ तुरंत कार्रवाई न करने के कारणों को सीबीआई ने अच्छी तरह से समझाया है और इसमें दुर्भावना की बू नहीं आती है। अदालत ने आगे कहा कि “यह सही और सत्य है” कि याचिकाकर्ता इस देश का कोई सामान्य नागरिक नहीं है, बल्कि मैग्सेसे पुरस्कार का एक प्रतिष्ठित विजेता और आम आदमी पार्टी का संयोजक है।