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ज्यादातर अमीर भारतीय अपने बच्चों को पढ़़ाई के लिए भेजते हैं विदेश: Study

September 15, 2024

ज्यादातर अमीर भारतीय अपने बच्चों को पढ़़ाई के लिए भेजते हैं विदेश: Study

मुंबई: तीन-चौथाई से अधिक अमीर भारतीयों ने अपने बच्चों को पढ़़ाई के लिए विदेश भेजा है या भविष्य में ऐसा करने की योजना बना रहे हैं। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह आकलन पेश किया गया है। मार्च में 1,456 भारतीयों के बीच यह सव्रेक्षण किया गया था। इन लोगों के पास 84 लाख रुपए (1 लाख डॉलर) से लेकर लगभग 17 करोड़ रुपए (20 लाख डॉलर) के बीच निवेश-योग्य अधिशेष था। अध्ययन में पाया गया कि अच्छी आíथक हैसियत वाले भारतीयों में अपने बच्चों को विदेशों में पढ़़ाने की तीव्र इच्छा है। अध्ययन में शामिल 78 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने बच्चों को विदेश में शिक्षा दिलाने के इच्छुक हैं। विदेशी ऋणदाता एचएसबीसी की तरफ से कराए गए वैश्विक जीवन गुणवत्ता, 2024 सव्रेक्षण के मुताबिक, भारतीयों के लिए शीर्ष विदेशी गंतव्य अमरीका है और उसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापूर का स्थान आता है। अध्ययन में कहा गया है कि बच्चों के लिए विदेश में पढ़़ाने की चाहत इतनी अधिक है कि माता-पिता उसे पूरा करने के लिए वित्तीय तनाव भी झेलने को तैयार हैं।

हालांकि शिक्षा में निवेश के लिए उन्हें सेवानिवृत्ति के लिए की गई बचत की बलि भी देनी पड़ सकती है। विदेश में पढ़़ाई करने की अनुमानित या वास्तविक वार्षकि लागत 62,364 डॉलर है। इसमें माता-पिता की सेवानिवृत्ति बचत का 64 प्रतिशत तक खर्च हो सकता है। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के माता-पिता विदेश में पढ़ाने के लिए अपनी सामान्य बचत में से पैसा निकालते हैं, ऋण लेते हैं और संपत्ति भी बेच देते हैं। सव्रेक्षण में कहा गया है कि विदेशी शिक्षा को अहमियत देने के पीछे प्राथमिक कारण विदेशी शिक्षा की गुणवत्ता है जबकि किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करने की संभावना दूसरे स्थान पर है। सव्रेक्षण के मुताबिक, जब कोई युवा पढ़़ाई के लिए विदेश जाता है तो माता-पिता की सबसे बड़ी ंिचंता वित्त जुटाने की होती है। इसके बाद सामाजिक या मानसिक चिंताए और शारीरिक या स्वास्थ्य संबंधी चिंताए भी उन्हें परेशान करती हैं।

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