
शिमला : बेशक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार 11 दिसंबर को दो साल का कार्यकाल पूरा कर रही है, सरकार को अपने पहले ही बजट की अग्निपरीक्षा के साथ-साथ राज्य सभा चुनाव में राजनीतिक झंझावात का सामना करना पड़ा। राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के साथ बजट पारित होने तक उठी सियासी आंधी में सरकार गिरने का अंदेशा था, कयास लगाए जाने लगे थे कि सरकार अब गई अथवा तब, मगर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ सलाह मशविरा कर प्रदेश में उठी राजनीतिक आंधी में सरकार को उड़ने से बचा लिया।
सरकार पर आया राजनीतिक तूफान का संकट टलने से पहले ही मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मैं एक योद्धा हूं, आम परिवार से निकला हुआ योद्धा लड़ाई में संघर्ष करता है, जीत संघर्ष की होती है। दरअसल हुआ भी कुछ यही। राजनीतिक तूफान विधान सभा परिसर तक पहुंचा, मगर परिसर की दीवारों से टकरा कर लौट गया।
नतीजतन सरकार अब दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर बिलासपुर में भव्य आयोजन कर रही है। बिलासपुर में आयोजन के कई राजनीतिचक मायने भी हैं। खासतौर पर इसलिए कि यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह क्षेत्र है। 27 फरवरी, 2023 को कांग्रेस को सत्ता में आए करीब अढ़ाई महीना ही बीता था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार का बजट 29 फरवरी को पारित होना था।
इससे पहले 27 फरवरी को राज्य सभा के लिए मतदान हुआ। मतदान में कांग्रेस के आधा दर्जन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। भाजपा के हर्ष महाजन व कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी दोनों को 34-34 वोट मिले। लॉटरी से महाजन विजयी हुए। मगर क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक इसके बाद भाजपा नेताओं के साथ पंचकूला व फिर उत्तराखंड घूमते रहे।
इस बीच 29 को बजट पारित होना था, मगर संकट को भांपते हुए बजट 28 फरवरी को पारित हुआ। बजट पारित होने से पहले सभी को कांग्रेस के बागी विधायकों की सदन में पहुंचने की उम्मीद थी, विधायक सदन में पहुंचे भी, मगर इससे पहले सदन हंगामे की वजह से स्थगित था। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने से पहले बागी विधायक फिर लौट गए।
विधान सभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू की तथा बजट ध्वनिमत से पारित हुआ। इससे पहले विपक्ष के कुछ सदस्यों पर भी सदन में हंगामे व मार्शलों के साथ हाथा पाई के मुद्दे पर कार्रवाई हुई। बजट पारित होने के साथ ही कांग्रेस विधायकों ने बागियों के खिलाफ पार्टी व्हिप की अवहेलना को लेकर कार्रवाई का मुद्दा सदन में उठाया।
आधा दर्जन बागी विधायकों को व्हिप की अवहेलना को लेकर सदन की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने बारे सत्ता पक्ष के विधायकों ने पेटिशन स्पीकर को दी। पेटिशन पर खासा सोच विचार के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया। सरकार तो फाइनेंस बिल पारित होने के साथ ही बच गई थी, मगर मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने अपने कथन ‘मैं एक योद्धा हूं’ को सत्य साबित कर दिया।
राजनीतिक तूफान थमने के बाद सूबे में विधानसभा उप चुनाव हुए। कांग्रेस ने बड़सर, धर्मशाला व हमीरपुर को छोड़ लाहौल-स्पीति, कुटलैहड़, सुजानपुर, देहरा, गगरेट तथा नालागढ़ उपचुनाव जीत लिए। नालागढ़ व देहरा पहले निर्दलीय जीते थे, निर्दलीय होशयार सिंह व केएल ठाकुर ने भी भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया था। इनके साथ तीसरे निर्दलीय आशीष शर्मा हमीरपुर से उप चुनाव जीते। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को बागियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, मगर बाद में याचिका वापस ले ली।
बहरहाल, सीएम सुक्खू ने योद्धा की तरह कांग्रेस के हिमाचल के किले को महफूज रखने में कामयाबी हासिल की, कांग्रेस का यह योद्धा अब बिलासपुर में अपने काबिना मंत्रियों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों के साथ सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर 11 दिसंबर को भव्य आयोजन में बतौर मु यमंत्री शिरकत करते हुए हिमाचल में ग्रामीण विकास पर केंद्रित योजनाओं की घोषणा करने की तैयारी में हैं।
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