
चंडीगढ़ : अमृतसर नगर निगम में मैन पावर की नियुक्तियों को लेकर हुई धांधली का मामला उलझता ही जा रहा है। जानकारी है कि 23 दिसंबर को कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया था। उसके बाद उन लोगों की नौकरी खतरे में आ गई है जो कि निगम के अलग-अलग विभागों में मैन पावर कॉन्ट्रैक्ट के तौर पर नियुक्त थे। हालांकि कागजों में नियुक्ती का आंकडा 700 है लेकिन सूत्रों के अनुसार असल में केवल 250 लोग ही विभागों में काम कर रहे थे।
बाकी की नियुक्तियां केवल कागजों तक ही सीमित थी और इन बाकी के लोगों की सैलरी काली भेड़ों के जेब में जाती थी। हालांकि यह सारा मामला जांच का विषय है जिसको लेकर जल्द ही हाईकोर्ट में सबूतों के साथ रिट दायर कर विजीलैंस जांच की मांग की जा सकती है। सूत्रों की मानें तो अगर इस टैंडर को लेकर विजीलैंस जांच होती है तो इसमें काली भेड़ों समेत कई दलाल भी फसने वाले हैं जिन्होंने यह कॉन्ट्रैक्ट जॉब दिलाने के लिए लोगों से लाखों रुपए एंठे हैं।
कहा जा सकता है कि इस धांधली के उजागर होने के बाद यह पिछले कई वर्षों से पंजाब में होने वाली बड़ी धांधली में से एक हो सकती है। दैनिक सवेरा के हाथ 700 कर्मचारियों की विभाग द्वारा बनाई गई सैलरी के कागजात हाथ लगे हैं जिनमें लोगों के एड्रैस तक मौजूद हैं। इन कागजातों से यह साबित हो सकता है कि नियुक्तियों को लेकर बड़ी धांधली हुई है।
27 उप-विभागों में काम कर रहे थे कर्मचारी :
बता दें कि मैन पावर कॉन्ट्रैक्ट के जरिए रखे गए 700 लोगों को लेकर कागजों में दर्शाया गया है कि वे नगर निगम के 27 उप विभागों में काम कर रहे थे जिनमें से फायर ब्रिगेड, चुनाव सैल, ओ एंड एम, आयुक्त कार्यालय, प्रोग्रामर कार्यालय, विज्ञापन, एमटीपी, सिविल विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जन्म और मृत्यु विभाग व अन्य कई विभाग शामिल हैं। काली भड़ें फर्म के टैंडर के पांचवी बार रिन्यू होने का इंतजार कर रही थी ताकि वह फिर से धांधली का खेल चला सकें लेकिन धांधली का पर्दाफाश होने के बाद काली भेड़ों की यह हसरत पूरी नहीं हो पाई और अब इस धांधली में शामिल सभी लोग डर के साए में हैं।
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