
भारत ने अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है, जिसकी पूर्ती कोई भी नहीं कर सकता। चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष, बीजेपी हो या कांग्रेस, आज हर राजनीतिक दल और देशवासी के दिलों में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए सम्मान है। उनकी विदाई से न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान भी शोक में डूबा हुआ है। उनका निधन देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसे कोई भी भर नहीं सकता। बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार सुबह 11.45 बजे दिल्ली के निगमबोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके योगदान और समर्पण को ध्यान में रखते हुए देश भर में शोक की लहर है।

पाकिस्तान के गाह गांव में शोक
पाकिस्तान के लोग उनके निधन पर बेहद दुखी हैं। पाकिस्तान में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल और उनके नेतृत्व की सराहना की जाती रही है। मनमोहन सिंह की छवि एक सुलझे हुए और ईमानदार नेता के रूप में रही है, जिन्होंने हमेशा देश की बेहतरी के लिए काम किया। बता दें कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले के गाह गांव के लोग भी डॉ. मनमोहन सिंह के निधन से बहुत दुखी हैं। गाह गांव के लोग मनमोहन सिंह के निधन को अपने परिवार के सदस्य की मौत जैसा महसूस कर रहे हैं। गाह गांव के रहने वाले अल्ताफ हुसैन ने बताया कि गांव के लोगों ने मनमोहन सिंह के निधन पर शोक सभा आयोजित की थी। हुसैन गाह गांव के उसी स्कूल में शिक्षक हैं, जहां मनमोहन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी।
मनमोहन सिंह का गाह गांव से जुड़ाव
दरअसल, मनमोहन सिंह का जन्म 4 फरवरी 1932 को हुआ था और उनका बचपन पाकिस्तान के गाह गांव में बीता था। उनके पिता गुरमुख सिंह एक कपड़ा व्यापारी थे और उनकी मां अमृत कौर एक गृहिणी थीं। गाह गांव इस्लामाबाद से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। मनमोहन सिंह के जन्म के समय यह झेलम जिले का हिस्सा था, लेकिन 1986 में इसे चकवाल जिले में शामिल कर लिया गया था। गाह गांव के स्कूल से ही मनमोहन सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली थी। स्कूल के रजिस्टर में मनमोहन सिंह का प्रवेश संख्या 187 और प्रवेश की तारीख 17 अप्रैल 1937 दर्ज है। उनका जाति विवरण ‘कोहली’ के रूप में उल्लेखित है।

गांव के लोग कैसे याद कर रहे हैं…
बता दें कि मनमोहन सिंह के निधन के बाद, गाह गांव के लोग उन्हें याद कर रहे हैं। गांव के उस स्कूल के शिक्षक ने कहा, “मनमोहन सिंह अपने जीवनकाल में गाह गांव नहीं आ सके, लेकिन अब जब वह नहीं रहे, तो हम चाहते हैं कि उनका परिवार इस गांव का दौरा करे।” मनमोहन सिंह के कुछ सहपाठी, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्होंने 2004 में उनके प्रधानमंत्री बनने पर खुशी व्यक्त की थी। उनके परिवार अब भी गाह गांव में रहते हैं और मनमोहन सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों पर गर्व महसूस करते हैं।

भारत में शोक की लहर
मनमोहन सिंह के निधन के बाद, भारत में हर राजनीतिक दल, चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष, बीजेपी हो या कांग्रेस, सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका अंतिम संस्कार शनिवार सुबह 11.45 बजे दिल्ली के निगमबोध घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मनमोहन सिंह को उनके योगदान, ईमानदारी, और देश के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका निधन न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश में भी एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
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