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1984 Anti Sikh Riots Case : सज्जन कुमार के खिलाफ दिल्ली की अदालत आज सुनाएगी फैसला

February 7, 2025

1984 Anti Sikh Riots Case : सज्जन कुमार के खिलाफ दिल्ली की अदालत आज सुनाएगी फैसला

1984 Anti Sikh Riots Case : दिल्ली की एक अदालत शुक्रवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में अपना फैसला सुनाएगी। यह मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या से जुड़ा है। विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा शुक्रवार को फैसला सुनाएंगी। 31 जनवरी को अदालत ने सरकारी वकील मनीष रावत की अतिरिक्त दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था। यह मामला 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा है।

16 साल बाद गवाह ने लिया नाम-
अधिवक्ता अनिल शर्मा ने दलील दी थी कि सज्जन कुमार का नाम शुरू से ही नहीं था, इस मामले में विदेशी भूमि का कानून लागू नहीं होता और गवाह ने सज्जन कुमार का नाम 16 साल बाद लिया। यह भी दलील दी गई कि सज्जन कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने वाला एक मामला सर्वोच्च न्यायालय में अपील के लिए लंबित है। अधिवक्ता अनिल शर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का द्वारा उद्धृत मामले का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि असाधारण स्थिति में भी देश का कानून ही प्रभावी होगा, न कि अंतरराष्ट्रीय कानून।

धीमी थी पुलिस जांच-
अपर सरकारी वकील मनीष रावत ने दलील दी कि आरोपी को पीड़िता नहीं जानती थी। जब उसे पता चला कि सज्जन कुमार कौन है, तो उसने अपने बयान में उसका नाम लिया। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का दंगा पीड़ितों की ओर से पेश हुए थे और उन्होंने दलील दी थी कि सिख दंगों के मामलों में पुलिस जांच में हेराफेरी की गई। पुलिस जांच धीमी थी और आरोपियों को बचाने के लिए की गई।

बड़े नरसंहार का हिस्सा-
तर्क दिया गया कि दंगों के दौरान स्थिति असाधारण थी। इसलिए इन मामलों को इसी संदर्भ में निपटाया जाना चाहिए। बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया और कहा कि यह कोई अलग मामला नहीं है, यह एक बड़े नरसंहार का हिस्सा है, यह नरसंहार का हिस्सा है।

अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना-
आगे दलील दी गई कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1984 में दिल्ली में 2,700 सिख मारे गए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता फुल्का ने दिल्ली कैंट के 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया था, जिसमें अदालत ने दंगों को ‘मानवता के खिलाफ अपराध‘ कहा था। यह भी कहा गया कि नरसंहार का उद्देश्य हमेशा अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना होता है।

कोर्ट में दाखिल नहीं की गई चाजर्शीट-
उन्होंने दलील दी, ‘इसमें देरी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और एक एसआईटी गठित की गई।‘ वरिष्ठ अधिवक्ता ने नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में विदेशी अदालतों द्वारा दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। उन्होंने जिनेवा कन्वेंशन का भी हवाला दिया। यह भी दलील दी गई कि सज्जन कुमार के खिलाफ 1992 में चाजर्शीट तैयार की गई थी, लेकिन कोर्ट में दाखिल नहीं की गई। इससे पता चलता है कि पुलिस सज्जन कुमार को बचाने की कोशिश कर रही थी।

आरोपों से किया इनकार-
1 नवंबर, 2023 को कोर्ट ने सज्जन कुमार का बयान दर्ज किया था। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था। शुरू में पंजाबी बाग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में जस्टिस जी पी माथुर कमेटी की सिफारिश पर गठित विशेष जांच दल ने इस मामले की जांच की और आरोप पत्र दाखिल किया।

ये लगी थी धाराएं-
समिति ने 114 मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी। यह मामला उनमें से एक था। 16 दिसंबर, 2021 को अदालत ने आरोपी सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148 और 149 के तहत दंडनीय अपराधों के साथ-साथ धारा 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436 और 440 के साथ धारा 149 आईपीसी के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए।

सिखों को जिन्दा जलाया-
एसआईटी ने आरोप लगाया है कि सज्जन कुमार ने भीड़ को हमला करने के लिए उकसाया, जिसके बाद भीड़ ने सरदार जसवंत सिंह और सरदार तरुण दीप सिंह को जिंदा जला दिया और उनके घरेलू सामान समेत अन्य संपत्ति को भी लूट लिया था। उनका घर भी जला दिया गया था। इस हमले में घर के कई लोगों को चोट भी आई थी।

गवाहों के ब्यान दर्ज-
यह दावा किया जाता है कि जांच के दौरान मामले के महत्वपूर्ण गवाहों का पता लगाया गया और उनकी जांच की गई और उनके बयान धारा 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज किए गए।

भयावह मंजर का किया ज़िकर-
आगे की जांच के दौरान 23 नवंबर, 2016 को उपरोक्त प्रावधान के तहत शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने फिर से अपने पति और बेटे की घातक हथियारों से लैस भीड़ द्वारा लूटपाट, आगजनी और हत्या की उपरोक्त घटना का वर्णन किया और उसने यह भी दावा किया कि उसने अपने और मामले के अन्य पीड़ितों, जिसमें उसकी भाभी भी शामिल है, को लगी चोट के बारे में बयान दिया है, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक उसने आरोपी की तस्वीर लगभग डेढ़ महीने बाद एक पत्रिका में देखी थी।

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