Last Updated: October 3, 2026

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महाकुंभ के समापन पर PM मोदी ने लिखा ब्लॉग, कहा- सेवा में कुछ कमी रह गई हो, तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं

February 27, 2025

महाकुंभ के समापन पर PM मोदी ने लिखा ब्लॉग, कहा- सेवा में कुछ कमी रह गई हो, तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं

नेशनल डेस्क :  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक चलने वाला महाकुंभ संपन्न हो गया। इस बीच देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम में पवित्र डुबकी लगाने पहुंचे। महाकुंभ के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ब्लॉग लिखा, जिसमें उन्होंने महाकुंभ के महत्व और इससे जुड़ी अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

महाकुंभ, एकता का महायज्ञ

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में महाकुंभ के समापन पर कहा कि यह महाकुंभ वास्तव में एकता का महायज्ञ था। उन्होंने लिखा कि 45 दिनों तक इस महाकुंभ में देशवासियों की आस्था एक साथ जुड़ी। 140 करोड़ भारतीयों की आस्था एक साथ इस महाकुंभ से जुड़ी, जो उन्हें बेहद अभिभूत करता है। यह दृश्य अपने आप में ऐतिहासिक था, जिसमें सभी समाज के लोग एकजुट होकर इस महापर्व में शामिल हुए।

 

परिश्रम और संकल्प से सफल हुआ महाकुंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ के सफल आयोजन के लिए देशवासियों के परिश्रम, संकल्प और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के आयोजन को सफल बनाने में हर भारतीय का योगदान था। यह महाकुंभ हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा है, जो हमें एकता और साझा संस्कृति की दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह देता है।

सोमनाथ दर्शन और प्रार्थना की इच्छा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में यह भी उल्लेख किया कि महाकुंभ की सफलता के बाद वह द्वादश ज्योतिर्लिंग में से पहले ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ के दर्शन करने जाएंगे। उन्होंने अपने श्रद्धा रूपी संकल्प को समर्पित करते हुए देशवासियों के लिए प्रार्थना की। उनका मानना है कि इस तरह की एकता की धारा देशवासियों में हमेशा बहती रहे। महाकुंभ में सभी वर्गों और क्षेत्रों के लोग एकजुट हुए। यह दृश्य “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना का प्रतीक बन गया। यह महाकुंभ देशवासियों में आत्मविश्वास और एकता का प्रतीक बनकर उभरा। प्रधानमंत्री ने इसे एक महापर्व माना, जो समाज को जोड़ने और मजबूत करने का कार्य कर रहा है।

भारत की ऊर्जा और युग परिवर्तन

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज भारत अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व महसूस कर रहा है, और यह एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। महाकुंभ के आयोजन ने यह साबित कर दिया कि भारत एक नए युग की ओर बढ़ रहा है, जहां नए बदलाव और विकास हो रहे हैं। यह युग परिवर्तन की शुरुआत है, जो देश के भविष्य को नया आकार देने जा रहा है।

मैनेजमेंट और नीति विशेषज्ञों के लिए एक अध्ययन

प्रधानमंत्री ने महाकुंभ को दुनियाभर के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए एक अध्ययन का विषय बताया। महाकुंभ के आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक जगह पर एकत्र करना और इसका सफल आयोजन करना एक अत्यंत जटिल और प्रभावशाली कार्य है।

महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी

प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या का उल्लेख किया और इसे केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और विरासत को मजबूत करने के लिए एक सशक्त नींव माना। यह महाकुंभ हमारी समृद्ध संस्कृति को कई सदियों तक बनाए रखने का आधार बनेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह ब्लॉग महाकुंभ के महत्व और भारतीय संस्कृति के सामूहिक विश्वास को और मजबूत करने के लिए प्रेरणादायक है।

महाकुंभ के समापन पर प्रार्थना

महाकुंभ के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि यह इतना विशाल और भव्य आयोजन कोई आसान काम नहीं था। उन्होंने इस अवसर पर मां गंगा, मां यमुना, और मां सरस्वती से प्रार्थना की और कहा कि अगर इस आयोजन में कहीं कुछ कमी रह गई हो, तो वह क्षमा करें।

मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती से प्रार्थना

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी प्रार्थना में कहा कि “हे मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती, हमारी आराधना में अगर कुछ कमी रह गई हो, तो कृपया हमें क्षमा करें।” यह शब्द उनके दिल से निकले हुए थे, जिसमें उन्होंने श्रद्धा और विनम्रता के साथ मां गंगा, यमुना और सरस्वती से आशीर्वाद मांगा।

जनता जनार्दन से क्षमायाचना

प्रधानमंत्री ने जनता जनार्दन, जिन्हें वे ईश्वर का स्वरूप मानते हैं, से भी क्षमायाचना की। उन्होंने कहा, “अगर श्रद्धालुओं की सेवा में हमसे कुछ कमी रह गई हो, तो मैं जनता जनार्दन से भी क्षमा प्रार्थी हूं।” उनका यह बयान दर्शाता है कि प्रधानमंत्री जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य को लेकर कितने संवेदनशील हैं। यह प्रार्थना प्रधानमंत्री मोदी के विनम्र और आस्थावान व्यक्तित्व को उजागर करती है, जो हर कार्य में ईश्वर और जनता की सेवा को सर्वोपरि मानते हैं।

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