Last Updated: October 7, 2026

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न्यायिक नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम प्रणाली बेकार : हरीश साल्वे

March 22, 2025

न्यायिक नियुक्तियों के लिए कॉलेजियम प्रणाली बेकार : हरीश साल्वे

Collegium System for Judicial Appointments : दिल्ली उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश से जुड़े कथित घर पर नकदी प्रकरण की पृष्ठभूमि में, भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए न्यायिक नियुक्ति की प्रणाली में व्यापक बदलाव का आवाह्न किया।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका के खिलाफ लगाए गए लांछन और अपुष्ट आरोप जनता की आस्था को हिला देते हैं और अंतत: लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े प्रकरण को चेतावनी बताते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारे पास न्यायिक नियुक्ति की जो प्रणाली है, वह निष्क्रिय है।

आग बुझाने गई फायर ब्रिगेड, तो बरामद हुई नकदी-
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले सप्ताह जब अग्निशमन विभाग की एक गाड़ी न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर आग बुझाने गई थी, तो वहां भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी।

 

 

विवाद से बदलाव-
उन्होंने ताजा विवाद को बदलाव की याद दिलाते हुए कहा, ‘हमें चर्चा फिर से शुरू करने की जरूरत है। यह अस्तित्व का संकट है। आपको इस संस्था को बचाना होगा।‘ साल्वे ने विधानमंडल, विशेषकर संसद सदस्यों से, न्यायिक नियुक्तियों के लिए एक परिष्कृत और अधिक पारदर्शी प्रणाली के लिए सामूहिक रूप से सुझाव देने का आवाह्न किया।

विचार-विमर्श की आवश्यकता-
उन्होंने कहा, ‘मैं देखता हूं कि जिन 500 लोगों को हमने वोट देकर सत्ता में भेजा है, उन्हें अपने राजनीतिक मतभेदों को एक तरफ रखना होगा। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें उन्हें एक साथ बैठकर विचार-विमर्श करना होगा, संसद में भेजे गए 500 लोगों के सामूहिक विवेक से एक ढांचा तैयार करना होगा।‘ उन्होंने न्यायपालिका के खिलाफ लगाए गए आरोपों की भी आलोचना की और कहा कि इससे लोगों की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

“हम अशांत समय में रह रहे”
उन्होंने अपुष्ट रिपोर्टिंग के खिलाफ सावधानी बरतने का संकेत देते हुए कहा, ‘हम बहुत ही अशांत और अलग समय में रह रहे हैं। आज, यह 1960, 70 और 80 का दशक नहीं है, जब खबरें सामने आने में कई हफ्ते लग जाते थे। आज, यह सोशल मीडिया का युग है। कोई घटना होती है। इसे वीडियो में कैद कर लिया जाता है और 15 मिनट में जारी कर दिया जाता है। दुनिया जानती है कि 15 मिनट पहले आपके घर में क्या हुआ था।‘

 

 

लोकतंत्र में न्यायपालिका एक सम्मानित संस्था-
उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका एक बहुत ही सम्मानित संस्था है। क्या हम बिना कार्यशील न्यायपालिका के रह सकते हैं? हम नहीं रह सकते। और अगर हम बिना कार्यशील न्यायपालिका के नहीं रह सकते, तो हमें इसे मजबूत करना होगा।‘ 1993 में बनाई गई वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली में भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक समूह शामिल है, जो उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण पर निर्णय लेता है।

प्रस्ताव हुआ खारिज-
इन चिंताओं को दूर करने के प्रयास में, सरकार ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) का प्रस्ताव रखा, जिसका उद्देश्य कॉलेजियम प्रणाली को गैर-न्यायिक सदस्यों वाले निकाय से बदलना था, लेकिन अंतत: 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।

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