Last Updated: November 7, 2026

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अवैध माइनिंग और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की कैबिनेट ने ‘पंजाब माइनर मिनरल नीति’ में संशोधनों को दी मंजूरी

April 4, 2025

अवैध माइनिंग और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की कैबिनेट ने ‘पंजाब माइनर मिनरल नीति’ में संशोधनों को दी मंजूरी

 illegal mining: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने वीरवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य में अवैध खनन को रोकने और रेत व बजरी की कीमतों को और कम करने का रास्ता साफ कर दिया। यहां मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके सरकारी आवास पर हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि मंत्रिमंडल ने ‘पंजाब राज्य माइनर मिनरल नीति’ में संशोधन करने के लिए सहमति दे दी है। इसका उद्देश्य बाजार में कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाना, अवैध खनन और भ्रष्टाचार को कम करना, राज्य का राजस्व बढ़ाना और खनन क्षेत्न में संभावित एकाधिकार को खत्म करना है। यह संशोधन क्र शर माइनिंग साइट्स (सी.आर.एम.एस.) से संबंधित है, जिसके तहत क्रशर मालिक, जिनके पास बजरी वाली जमीन है, अब खनन लीज प्राप्त कर सकेंगे। इस कदम से अन्य राज्यों से खनन सामग्री की अवैध परिवहन पर रोक लगने की संभावना है।

इससे बाजार में कुचली हुई रेत और बजरी की उपलब्धता बढ़ेगी, जो राज्य में विकास गतिविधियों के लिए आवश्यक है। इसी तरह लैंडऑनर माइनिंग साइट्स (एल.एम.एस.) के तहत रेत वाली जमीनों के मालिकों को सुविधा होगी और वे खनन लीज के लिए आवेदन कर सकेंगे तथा खनन सामग्री को सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर खुले बाजार में बेच सकेंगे। पहले जमीन मालिकों की सहमति न होने के कारण कई खनन स्थल कार्यशील नहीं थे, क्योंकि जमीन मालिक अपनी जमीन से किसी अज्ञात व्यक्ति को खनन की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं होते थे। एल.एम.एस. की शुरु आत से कार्यशील खनन स्थलों की संख्या बढ़ेगी, जिससे बाजार आपूर्ति बढ़ने के साथ-साथ राज्य का राजस्व भी बढ़ेगा। यह कदम खनन क्षेत्र में एकाधिकार को खत्म करेगा।

इसके अलावा, डिप्टी कमिश्नरों को सरकारी और पंचायती जमीनों के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टीफिकेट (एन.ओ.सी.) जारी करने का अधिकार दिया गया है, क्योंकि वे इन जमीनों के संरक्षक होते हैं। यह बदलाव प्रक्रिया को सुचारू बनाएगा और सरकारी जमीनों पर खनन स्थलों के संचालन को तेज करेगा।

इसी तरह ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्र योजना’ के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है, जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थ यात्र कराई जाएगी। यात्र का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी, जिसमें वातानुकूलित यात्र, आरामदायक आवास और भोजन-पान की व्यवस्था आदि सुविधाएं शामिल होंगी। यात्र को यादगार बनाने के लिए सरकार की ओर से श्रद्धालुओं को स्मृति-चिन्ह के रूप में उपहार भी दिया जाएगा। प्रवक्ता ने बताया कि 50 वर्ष और इससे अधिक उम्र के सभी नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना हर जाति, धर्म, आय और क्षेत्र के लोगों के लिए है। पंजाब के सभी शहरों और गांवों के लोग इस योजना का लाभ ले सकते हैं। यात्र का उद्देश्य राज्य की समृद्ध आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मूर्त रूप देना है और इसमें सभी प्रमुख धार्मिक स्थानों की यात्नाएं शामिल होंगी।

प्रवक्ता ने बताया कि यात्र के दौरान सत्संग और कीर्तन आदि धार्मिक गतिविधियां भी होंगी। यात्र पूरी होने के बाद सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया जाएगा। इस योजना के लिए 100 करोड़ रु पए का बजट रखा गया है और यदि जरूरत पड़ी तो इसे और बढ़ाया जाएगा। तीर्थ यात्र पर जाने वालों के लिए पंजीकरण अप्रैल के आखिरी सप्ताह से शुरू होगा और यात्र मई में शुरू होगी।

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