Last Updated: September 25, 2026

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America के 50 राज्यों में Trump और मस्क के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, लोग बोले- दोनों मिलकर देश को बर्बाद कर रहे

April 6, 2025

America के 50 राज्यों में Trump और मस्क के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, लोग बोले- दोनों मिलकर देश को बर्बाद कर रहे

इंटरनेशनल डेस्क : संयुक्त राज्य अमेरिका में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन शनिवार को देखने को मिला। बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कारोबारी एलन मस्क के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन प्रदर्शनों में ट्रंप प्रशासन की नीतियों, जैसे सरकारी नौकरियों में छंटनी, अर्थव्यवस्था, मानवाधिकार, टैरिफ, और अन्य मुद्दों पर विरोध जताया जा रहा है। शनिवार को पूरे अमेरिका में रैलियां आयोजित की गईं, जहां प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप और मस्क को देश के लिए खतरा बताते हुए आरोप लगाया कि दोनों मिलकर अमेरिका को नष्ट करने का काम कर रहे हैं। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

150 से अधिक संगठनों का विरोध

आपको बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन में नागरिक अधिकार संगठनों, श्रमिक संघों, एलजीबीटीक्यू+ समुदाय, वकील, पूर्व सैन्यकर्मी, और चुनाव कार्यकर्ता सहित 150 से अधिक समूह शामिल हुए। हजारों प्रदर्शनकारी शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और कार्यकारी आदेशों, जिनमें टैरिफ भी शामिल हैं, के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए एकत्र हुए। यह विरोध ट्रंप और मस्क के प्रशासन के खिलाफ था, जिनके बारे में प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे देश के हितों से अधिक निजी स्वार्थों के लिए काम कर रहे हैं।

Canada और Mexico में भी विरोध

इस विरोध प्रदर्शन का असर केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं था। कनाडा और मेक्सिको जैसे पड़ोसी देशों में भी प्रदर्शन आयोजित किए गए। आयोजकों के अनुसार, लगभग 150 कार्यकर्ता समूहों ने विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। वाशिंगटन डीसी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा निवास के पास भी बड़ी संख्या में लोग जुटे और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। बता दें कि अमेरिका के सभी 50 राज्यों के लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

‘हाथ हटाओ’ की तख्ती लेकर प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों ने ‘हाथ हटाओ’ (Hands Off) स्लोगन वाली तख्तियां ले कर विरोध किया, जो कि एक प्रमुख नारा बन गया। यह विरोध प्रदर्शन एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में देखा गया, जिसमें ट्रंप और मस्क की सत्ता को चुनौती दी गई और उन्हें उनके कथित गलत कार्यों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

मंदी और छंटनी से परेशान लोग

एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “हमारे राष्ट्रपति ट्रंप अन्य हितों और टैरिफ की कठपुतली हैं। ट्रंप और मस्क हमारे देश को नष्ट करने का एक साधन बन गए हैं, जो निजी स्वार्थों के लिए काम कर रहे हैं।” एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम सभी यहां इसलिए हैं क्योंकि हम टैरिफ और देश में चल रही मंदी के कारण परेशान हैं।”

महात्मा गांधी की प्रेरणा

एक प्रदर्शनकारी ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा, “मैं गांधी से बहुत प्रेरित हूं। आज मैं यहां हूं क्योंकि यह हमारा महासागर और नमक है। जहां तक विश्व वाणिज्य और विनिमय का सवाल है, हमारे पास एक-दूसरे को देने के लिए बहुत कुछ है।” उनका कहना था कि “पहले मैं, पहले मेरा देश, पहले मेरा उत्पाद” का यह लालच दुनिया और मानवता के लिए अस्थिर है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

‘यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा’

एक और प्रदर्शनकारी ने कहा, “मैं दो साल से कोलकाता में रह रहा हूं। यह वह शहर है, जहां देवी मां काली, एक महान और शक्तिशाली शक्ति निवास करती हैं। वह शक्ति भारत और दुनिया में हर जगह निवास करती है। हम आज यहां वाशिंगटन स्मारक पर यह कहने आए हैं कि यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप इतिहास में अपराधियों के रूप में जाने जाएंगे। इन लोगों को सत्ता में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

नौकरी खोने वाले लोग

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “मैं यहां उन सभी लोगों का समर्थन करने आया हूं जो अपनी नौकरी, स्वास्थ्य बीमा, चिकित्सा, सामाजिक सुरक्षा, आवास और भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लोग परेशान हैं क्योंकि उनके पास पैसे नहीं हैं और कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है।” प्रदर्शनकारियों का कहना था कि ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से बेरोजगारी बढ़ी है और लोगों को नौकरी खोने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन उनके प्रशासन की नीतियों, अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और मंदी के कारण हो रहा है। प्रदर्शनकारी उनका विरोध करते हुए उन्हें देश के लिए खतरा मानते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह विरोध आंदोलन ट्रंप और मस्क की सरकार के खिलाफ एक बड़ी आवाज बन चुका है, जिसमें लोगों ने अपनी नौकरी, अधिकारों और देश के भविष्य के लिए अपनी चिंता जताई है।

 

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