
नेशनल डेस्क : भारत को आज यानी 14 मई को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायमूर्ति गवई को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उन्होंने औपचारिक रूप से अपने कार्यभार की शुरुआत की। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का अभिवादन किया। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
#WATCH | Delhi: CJI BR Gavai greets President Droupadi Murmu, Prime Minister Narendra Modi, Vice President Jagdeep Dhankhar, former President Ram Nath Kovind and other dignitaries at the Rashtrapati Bhavan. He took oath as the 52nd Chief Justice of India.
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— ANI (@ANI) May 14, 2025
जस्टिस गवई का न्यायिक सफर
आपको बता दें कि जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को अमरावती, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपनी वकालत की शुरुआत 16 मार्च, 1985 को की थी, जब वे बार में शामिल हुए। शुरुआत में वे महाराष्ट्र हाईकोर्ट के महाधिवक्ता (Advocate General) और वरिष्ठ वकील बैरिस्टर राजा भोंसले के साथ जुड़े रहे। इसके बाद उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से वकालत की। उसके बाद उन्होंने मुख्य रूप से संवैधानिक कानून और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में प्रैक्टिस की। वे 1992 में सहायक सरकारी वकील और फिर अतिरिक्त लोक अभियोजक बने। 2000 में, उन्हें सरकारी वकील और लोक अभियोजक नामित किया गया। उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और फिर 2005 में स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।

कार्यकाल और सेवानिवृत्ति
हालांकि, जस्टिस गवई का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं होगा। वे लगभग 6 महीने तक देश के चीफ जस्टिस रहेंगे, क्योंकि वे इस साल 23 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। जस्टिस गवई अपने 65 वर्ष की आयु पूरी कर रिटायर हो जाएंगे। हालांकि कार्यकाल छोटा है, लेकिन उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।
दलित समुदाय से आने वाले दूसरे चीफ जस्टिस
जस्टिस गवई का मुख्य न्यायाधीश बनना इसलिए भी खास है क्योंकि वे दलित समुदाय से आने वाले दूसरे CJI होंगे। उनसे पहले जस्टिस के.जी. बालकृष्णन को यह सम्मान मिला था, जो 2007 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने थे। इस तरह, गवई का चयन सामाजिक न्याय और विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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