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“अराजकता के सौ दिन” अमेरिका के लिए खतरे की घंटी 

May 1, 2025

“अराजकता के सौ दिन” अमेरिका के लिए खतरे की घंटी 

इंटरनेशनल डेस्क : “अभूतपूर्व विनाश और अराजकता”, “महान विफलता”, “विनाशकारी 100 दिन”… 29 अप्रैल को, जब वर्तमान अमेरिकी सरकार अपने कार्यकाल के 100वें दिन पर पहुंची, तो इसका स्वागत फूलों और तालियों से नहीं, बल्कि देश और विदेश में भारी आलोचना और निंदा के साथ हुआ। हाल ही में अमेरिकी मीडिया द्वारा शुरू किए गए एक संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार, 55% उत्तरदाताओं का वर्तमान सरकार के प्रदर्शन के प्रति नकारात्मक रवैया था, जो पिछले 80 वर्षों में इसी अवधि के लिए सबसे खराब रिकॉर्ड है।

बड़े पैमाने पर छंटनी योजना को लागू करना, आप्रवासियों के साथ सख्ती से पेश आना, वैज्ञानिक अनुसंधान के वित्तपोषण में भारी कटौती करना, और सभी व्यापारिक साझेदारों पर “पारस्परिक टैरिफ” लगाना… वर्तमान अमेरिकी सरकार द्वारा पदभार ग्रहण करने के बाद से उठाए गए सिलसिलेवार नीतिगत उपायों ने अमेरिकी लोगों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को वास्तविक नुकसान पहुंचाया है। नेचर पत्रिका के एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 75% अमेरिकी शोधकर्ता अमेरिका छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। प्रसिद्ध अमेरिकी होस्ट फ़रीद ज़कारिया का मानना ​​है कि मात्र 100 दिनों ने उस वैज्ञानिक बढ़त की नींव हिला दी है जो अमेरिका ने पिछली शताब्दी में हासिल की थी।

 इस के साथ अमेरिका के लिए, अतिरिक्त टैरिफ लगाना स्वयं को नुकसान पहुंचाने का कार्य है। बस इतना ही नहीं। पिछले 100 दिनों में, तीन प्रमुख अमेरिकी शेयर सूचकांकों में 8% से अधिक की गिरावट आई है, अमेरिकी डॉलर सूचकांक में गिरावट जारी है, विदेशी निवेशकों द्वारा बड़ी मात्रा में अमेरिकी ऋण बेचा गया है, और अन्य देशों के जवाबी उपायों के कारण सेवा व्यापार क्षेत्र में भी नौकरियां खत्म हुई हैं… ब्लूमबर्ग ने कहा कि तथाकथित “अमेरिका फर्स्ट” आर्थिक क्रांति शीघ्र ही “सबसे निचले स्तर के अमेरिका” में बदल गयी। न्यूयॉर्क टाइम्स का मानना ​​है कि अमेरिकी सरकार का “100-दिवसीय तूफान”अमेरिका में “ऐतिहासिक मंदी” ला सकता है।

विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, अमेरिकी सरकार की “सौ दिन की आघात लहर” ने विश्व व्यवस्था को भी बहुत नुकसान पहुंचाया है। यह लोगों को स्पष्ट रूप से देखने की अनुमति देता है: तथाकथित “अमेरिका फर्स्ट” वास्तव में “अमेरिका का जोखिम” है और अमेरिका दुनिया से दूर जा रहा है।

अमेरिका द्वारा अनुभव की जा रही “सौ दिनों की अराजकता” हमें यह भी बताती हैं कि “जंगल का कानून” अलोकप्रिय है, आधिपत्यवाद जो चाहे वह नहीं कर सकता, आर्थिक वैश्वीकरण की प्रवृत्ति अपरिवर्तनीय है, और खुलापन, सहयोग, आपसी लाभ और समान जीत परिणाम ही मानव जाति के लिए सही रास्ता है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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