
इंटरनेशनल डेस्क : मालदीव के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्ला खलील ने भारत सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने मालदीव को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और सहयोग का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह सहायता मालदीव की आर्थिक मजबूती में सहायक सिद्ध होगी।
सोशल मीडिया पर आभार…
आपको बता दें कि मालदीव के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मैं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और भारत सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मालदीव को 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल को रोलओवर करके महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की।” उन्होंने यह भी कहा कि यह समय पर दी गई सहायता दोनों देशों के बीच के गहरे रिश्तों को और मजबूती प्रदान करेगी और मालदीव की आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक वित्तीय सुधारों को लागू करने में सहयोग देगी।
ट्रेजरी बिल से मिली वित्तीय सहायता
मालदीव में भारत के उच्चायोग ने सितंबर 2023 में बताया था कि भारत ने मालदीव सरकार के अनुरोध पर 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ट्रेजरी बिल को एक और साल के लिए बढ़ा दिया था, जिससे मालदीव को बजटीय सहायता मिल सकी। इस सहायता के जरिए मालदीव को आर्थिक स्थिति को सुधारने में मदद मिली और यह दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में अहम कदम साबित हुआ।
मालदीव के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
दरअसल, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने अक्टूबर 2023 में भारत यात्रा की थी, जो भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के निमंत्रण पर आयोजित हुई थी। यह उनकी पदभार ग्रहण के बाद भारत की पहली यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और समुद्री सुरक्षा साझेदारी के लिए विजन को अपनाया गया था, जो भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को दिशा देने में मदद करेगा।
सहायता पर राष्ट्रपति मुइज्जू का आभार
राष्ट्रपति मुइज्जू ने भारत की वित्तीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था, जिसमें टी-बिलों को बिना ब्याज के एक अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाना और द्विपक्षीय मुद्रा स्वैप समझौते के तहत 30 अरब रुपये से 400 मिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त समर्थन शामिल था। उन्होंने भारत को निरंतर समर्थन देने के लिए धन्यवाद कहा।
द्विपक्षीय समझौतों का आदान-प्रदान
इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने वर्चुअल उद्घाटन किया और समझौतों का आदान-प्रदान भी किया। यह समझौते विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए किए गए थे, और इनका उद्देश्य आर्थिक और समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना था।
भारत और मालदीव के बीच इस वित्तीय सहायता को लेकर समझौतों का आदान-प्रदान और आभार का यह सिलसिला दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करता है। यह न केवल मालदीव की आर्थिक मजबूती के लिए सहायक होगा, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों में भी नई ऊंचाइयां तक पहुंचने में मदद करेगा।