नेशनल डेस्क: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ दिनों तक तनाव और सैन्य झड़पें चलती रहीं। भारत ने आतंकियों और उनके समर्थक ठिकानों पर सख्त कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम (सीजफायर) की अपील की गई, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि भारत ने युद्ध क्यों नहीं किया। इन्हीं सवालों पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने एक कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट और सशक्त बयान दिया है।
क्या कहा जनरल नरवणे ने?
रविवार को पुणे में एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल नरवणे ने कहा, “युद्ध कोई रोमांटिक या फिल्मी चीज नहीं होती। यह असल जिंदगी की गंभीर सच्चाई है, जिससे लोगों की जान और भविष्य जुड़ा होता है।” उन्होंने बताया कि अगर सरकार आदेश दे तो एक सैनिक के नाते वह युद्ध के लिए तैयार होते, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा ‘डिप्लोमेसी’ यानी बातचीत से हल निकालने की होती है। जब युद्ध होता है, तो सीमा के पास रहने वाले आम लोग, खासकर बच्चे, डर के साए में जीने लगते हैं और उन्हें सुरक्षित जगह की तलाश में भागना पड़ता है। ऐसे हालात गहरी मानसिक पीड़ा छोड़ते हैं।
“युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए”
जनरल नरवणे ने कहा, “हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। यह केवल तब होनी चाहिए जब कोई रास्ता न बचे।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की भी सराहना की जिसमें कहा गया था कि ”यह युद्ध का युग नहीं है।”
नागरिकों को भी निभानी होगी भूमिका
जनरल नरवणे ने यह भी कहा कि सिर्फ सरकार या सेना नहीं, बल्कि हर नागरिक को देश की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में भागीदारी निभानी चाहिए। हम सभी को, चाहे वह राज्य, समाज, या परिवार हो, संवाद के ज़रिए विवाद सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के भीतर कुछ लोग युद्ध की मांग कर रहे हैं। जनरल नरवणे ने एक जिम्मेदार सैनिक और नागरिक के तौर पर बातचीत, शांति और विवेक को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।
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