इंटरनेशनल डेस्क : कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपनी नई कैबिनेट में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय मूल की अनीता आनंद को विदेश मंत्री नियुक्त किया है। अनीता ने भगवद गीता पर हाथ रखकर शपथ ली, जो उनके सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है। उन्होंने मेलानी जोली की जगह ली है, जो अब परिवहन और आंतरिक व्यापार मंत्रालय संभालेंगी। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
भारत के साथ रिश्तों की बहाली अहम मिशन
प्रधानमंत्री कार्नी ने साफ किया है कि अनीता आनंद की सबसे अहम जिम्मेदारी भारत के साथ बिगड़े संबंधों को फिर से बेहतर करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रिश्ते लगभग टूटने की कगार पर हैं, और यह नई विदेश मंत्री का मुख्य मिशन होगा कि वह राजनयिक संवाद दोबारा शुरू करें और भरोसे की बहाली करें। इसके अलावा, अनीता को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी तालमेल बढ़ाना होगा, ताकि अमेरिका-कनाडा संबंधों को और मज़बूती दी जा सके।
राजनीति छोड़ने का किया था इरादा…
जनवरी में अनीता आनंद ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह राजनीति से संन्यास लेकर शिक्षा क्षेत्र में लौटना चाहती हैं। लेकिन अप्रैल में हुए चुनावों में जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री कार्नी ने उन्हें मनाया और विदेश मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी। अनीता पहले भी रक्षा और परिवहन मंत्रालय में काम कर चुकी हैं, इसलिए उन्हें अनुभवी नेता माना जा रहा है।
कार्नी की नई कैबिनेट में बदलाव
मार्क कार्नी को पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कैबिनेट विरासत में मिली थी, लेकिन अब चुनाव जीतने के बाद उन्होंने अपनी स्वतंत्र छवि बनाते हुए नई टीम का गठन किया है। ट्रूडो की सरकार में जहां 39 मंत्री थे, वहीं कार्नी ने केवल 28 मंत्रियों को चुना है और सभी को स्पष्ट संदेश दिया है कि निर्णायक कार्रवाई और नए विचारों के साथ काम करना होगा।
भारतीय मूल के नेताओं की नई भूमिका
नई कैबिनेट में भारतीय मूल के नेताओं की संख्या कम हो गई है। हालांकि, मनिंदर सिद्धू को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा, रूबी सहोता और रणदीप सराय को राज्य सचिव (स्टेट सेक्रेटरी) बनाया गया है, जो कनाडा की कैबिनेट में जूनियर मंत्री के बराबर होते हैं। रूबी को अपराध नियंत्रण, जबकि रणदीप को अंतरराष्ट्रीय विकास का कार्यभार सौंपा गया है।
विवादों में रही थीं पूर्व विदेश मंत्री मेलानी जोली
मेलानी जोली, जिन्हें अनीता आनंद ने रिप्लेस किया है, पिछले साल भारत के साथ गंभीर कूटनीतिक टकराव का कारण बनी थीं। उन्होंने छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था और खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के संदर्भ में भारत पर उंगली उठाई थी। भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया था और जवाब में कनाडा के राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया था।
पिछली कैबिनेट से हटाए गए कई भारतीय चेहरे
पूर्व मंत्री हरजीत सिंह सज्जन ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा और राजनीति से बाहर हो गए हैं। वहीं, आरिफ विरानी, जो न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल थे, और कमल खेड़ा, जो दिव्यांगजनों के लिए समावेशन मंत्री थीं, उन्हें भी इस बार कैबिनेट से बाहर कर दिया गया है।
अनीता आनंद की भूमिका अहम
अनीता आनंद का विदेश मंत्री बनना केवल उनके करियर के लिए नहीं, बल्कि भारत-कनाडा के भविष्य के रिश्तों के लिए भी निर्णायक क्षण हो सकता है। दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ा है, और अनीता की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक अनुभव इस तनाव को कम करने में सहायक हो सकती है।
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