Wheat : पंजाब में चालू रबी सीजन के लिए गेहूं खरीद का अंतिम चरण चल रहा है। इस बार निजी क्षेत्र द्वारा की गई खरीद में रिकार्ड उछाल आया है। अब तक राज्य की मंडियों में 129 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें सरकारी खरीद एजैंसियों ने 118 लाख मीट्रिक टन जबकि निजी क्षेत्र ने 11 लाख मीट्रिक टन खरीद की है। बताया जा रहा है कि पिछले सालों के मुकाबले इस सत्र में निजी क्षेत्र ने गेहूं की बड़े पैमाने पर खरीद की है और यह कुल खरीद का 8.23 फीसदी तक है।
अभी तक के खरीद विवरणों के मुताबिक राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय किए गए लक्ष्य 124 लाख एमटी से काफी पीछे है लेकिन निजी क्षेत्र की खरीद के आंकड़ें चौकाने वाले हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि निजी क्षेत्र ने 2,450 रुपए प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य से हटकर उससे अधिक 2,640 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीद की है। निजी क्षेत्र ने 200 रुपए प्रति क्विंटल अधिक भुगतान कर खरीद की है। इस साल निजी क्षेत्र ने 8.23 फीसदी की खरीद की जबकि सन 2024-24 में यह आंकड़ा 5.51 फीसदी था।
किसानों के पास अपनी जिंस बेचने के विकल्प मिल रहे
निजी क्षेत्र द्वारा अधिक मूल्य पर गेहूं खरीद को सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। लेकिन, इससे सरकारी खरीद की निर्भरता कम होती जा रही है। माना जा रहा है कि इस नए समीकरण से किसानों के पास अपनी जिंस को बेचने के लिए विकल्प मिल रहे हैं और यह उन्हें आर्थिक लाभ भी दे रहा है। आढ़तियों के मुताबिक इस बार स्थानीय आटा मिले उत्तर प्रदेश और राजस्थान की मंडियों की बजाय पंजाब की मंडियों से गेहूं की खरीद कर रहे हैं।
पहले पंजाब की आटा मिले उत्तर प्रदेश व राजस्थान से कम दामों पर गेहूं की खरीद करती रही हैं लेकिन अब समीकरण बदल गए हैं और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के किसानों ने एमएसपी पर बिक्री शुरु कर दी है। राजस्थान सरकार ने तयशुदा एमएसपी पर 150 रुपए अतिरिक्त भुगतान की घोषणा के कारण भी पंजाब में निजी क्षेत्र की खरीद बढ़ी है। पंजाब से गेहूं खरीदने से आटा मिलों को ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम हो रहा है। निजी क्षेत्र की खरीद बढ़ने के कारण राज्य सरकार पर गेहूं के भंडारण का दबाव कम हो रहा है। गोदामों में गेहूं क ो सुरक्षित रखने के लिए लकड़ी के क्रेट की अलग से व्यवस्था करनी पड़ती थी। इस बार 19 लाख लकड़ी के क्रेट की जरूरत बताई जा रही है।