नेशनल डेस्क : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी विवादास्पद नीतियों के जरिए सुर्खियों में हैं। ‘अमेरिका को फिर से महान बनाने’ की मुहिम के तहत वे एक ऐसा प्रस्ताव लेकर आए हैं, जो न केवल अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय के लिए चिंता का कारण है, बल्कि इससे सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ सकता है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…
विदेश भेजे जाने वाले पैसों पर लगेगा 5% TAX
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 12 मई 2025 को ‘द वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ नामक विधेयक पेश किया गया है। इस विधेयक में एक प्रावधान शामिल है, जिसके तहत गैर-अमेरिकी नागरिकों द्वारा विदेश भेजे गए पैसों (Remittances) पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। यह टैक्स उन लोगों पर लागू होगा जो ग्रीन कार्ड, H-1B, या H-2A वीजा पर अमेरिका में रहकर काम कर रहे हैं।
यह नियम अमेरिकी नागरिकों पर लागू नहीं होगा।
भारतीयों के लिए गहरी चिंता
इस प्रस्ताव ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर, आईटी और कृषि क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और वे नियमित रूप से अपने घर पैसे भेजते हैं। अगर यह टैक्स लागू हुआ, तो इससे रेमिटेंस भेजना काफी महंगा और मुश्किल हो जाएगा।
भारत को अरबों डॉलर का नुकसान संभव!
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 120 अरब डॉलर का रेमिटेंस प्राप्त हुआ था, जिसमें से करीब 28% रेमिटेंस केवल अमेरिका से आया था। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भारत को सालाना 12-18 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा का नुकसान हो सकता है।
रुपये पर दबाव और RBI की चुनौतियाँ
श्रीवास्तव के अनुसार, रेमिटेंस में संभावित गिरावट से डॉलर की आपूर्ति कम हो सकती है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हालात में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए बार-बार बाज़ार में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इससे रुपये की कीमत 1 से 1.5 रुपये प्रति डॉलर तक गिर सकती है। यह प्रस्ताव केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों को प्रभावित कर सकता है। श्रीवास्तव के अनुसार, रेमिटेंस पर टैक्स लगाने से दुनिया भर में गरीब परिवारों की आमदनी प्रभावित होगी और आर्थिक असमानता और अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सीमा पार पूंजी प्रवाह की लागत को कम करने का प्रस्ताव रखा था। ऐसे में अमेरिका द्वारा यह टैक्स लगाने से भारत की इस पहल को झटका लग सकता है।
भारतीयों को सलाह: जल्द करें बड़े रेमिटेंस
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक हाउस और सीनेट से पारित हो गया, तो यह जुलाई 2025 तक कानून बन सकता है। इस बीच भारतीय समुदाय को सलाह दी जा रही है कि वे बड़े रेमिटेंस अभी कर लें, ताकि उन्हें अतिरिक्त टैक्स से बचा जा सके।
आर्थिक झटका या राजनीतिक चाल ?
डोनाल्ड ट्रंप के इस प्रस्ताव को आर्थिक सुधार की बजाय राजनीतिक रणनीति भी माना जा रहा है, जो अमेरिका में बढ़ती विदेशी-विरोधी भावना को भुनाने का एक तरीका हो सकता है। लेकिन इसका प्रभाव, खासकर भारत जैसे देशों पर, आर्थिक दृष्टि से दीर्घकालिक और गहरा हो सकता है।