नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के बहुदलीय राजनयिक मिशन का बहिष्कार नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह कहा कि कोई भी एकतरफा फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा, और पार्टी अपनी पसंद से ही किसी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले सदस्य का नाम तय करेगी।
ममता बनर्जी ने कहा, “केंद्र सरकार नाम तय नहीं कर सकती। यदि वे हमें अनुरोध करते, तो हम अपने प्रतिनिधि का नाम भेजते। यह एक परंपरा है, यह व्यवस्था है। हम विदेश नीति के मामले में केंद्र सरकार के साथ खड़े हैं और उनका समर्थन करते हैं।”
ममता बनर्जी का बयान
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर केंद्र सरकार उनसे संपर्क करती, तो उनकी पार्टी एक प्रतिनिधि भेजने के लिए तैयार होती, लेकिन बिना किसी अनुरोध के वे एकतरफा फैसलों को स्वीकार नहीं कर सकते। ममता ने कहा, “हमें कोई अनुरोध नहीं आया था। अगर हमें कोई ऐसा अनुरोध आता, तो हम इसे विचार कर सकते थे। हमें यह तय करने का हक है कि हमारे पार्टी का सदस्य कौन होगा।”
अभिषेक बनर्जी का समर्थन
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी केंद्र सरकार के साथ खड़े होने की बात कही। उन्होंने कहा, “टीएमसी केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी, जब भी आतंकवाद के खिलाफ कोई कदम उठाया जाएगा, क्योंकि यह देश के राष्ट्रीय हित में है। लेकिन यह तय करना कि हमारी पार्टी से कौन सदस्य जाएगा, यह हमारा अधिकार है। केंद्र सरकार एकतरफा फैसला नहीं ले सकती।”
बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य
केंद्र सरकार ने एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद और वैश्विक गलत सूचनाओं का मुकाबला करने के लिए दुनिया भर में भारत की शून्य सहिष्णुता नीति को बढ़ावा देगा। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न पार्टियों के सांसदों को 8-9 सदस्यीय सात समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह का एक नेता होगा जो उस समूह का नेतृत्व करेगा। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि टीएमसी इस मिशन का समर्थन करती है, लेकिन वह यह चाहती है कि पार्टी से कौन सदस्य जाएगा, यह केवल पार्टी का ही निर्णय हो।
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