नेशनल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर लिखा कि उन्होंने प्रोफेसर का पूरा बयान पढ़ा, लेकिन यह समझ नहीं आया कि हरियाणा पुलिस को उसमें आपत्तिजनक क्या लगा। उन्होंने पुलिस से यह साफ करने को कहा कि आखिर उनके बयान का कौन सा हिस्सा कानून का उल्लंघन करता है।
गिरफ्तारी का मामला क्या है?
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद, जो अशोका यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हैं, को रविवार को दिल्ली में उनके घर से गिरफ्तार किया गया। ये गिरफ्तारी “ऑपरेशन सिंदूर” पर सोशल मीडिया पर की गई उनकी एक टिप्पणी को लेकर हुई है। पुलिस का आरोप है कि उनके बयान से देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरा हुआ है। इसके अलावा, उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
हरियाणा महिला आयोग ने भी प्रोफेसर की पोस्ट को महिलाओं और खासकर सेना की महिला अफसरों के लिए अपमानजनक बताया। आयोग का कहना है कि इस बयान से सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ सकता है। आयोग ने 13 मई को प्रोफेसर को समन भेजा था, जिस पर प्रोफेसर ने सफाई दी थी कि उनके बयान को गलत समझा गया है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
इस मामले में प्रोफेसर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस याचिका का ज़िक्र सुप्रीम कोर्ट में किया और तत्काल सुनवाई की मांग की। चीफ जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 20 या 21 मई को की जाएगी। कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा, “उन्हें देशभक्ति की भावना के साथ की गई टिप्पणी के लिए गिरफ्तार किया गया है।”
यूनिवर्सिटी की प्रतिक्रिया
अशोका यूनिवर्सिटी ने भी एक बयान जारी कर कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को हिरासत में लिया गया है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि वह पुलिस और प्रशासन के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है और मामले की जानकारी इकट्ठा कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
भारत सरकार ने 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया था। यह एक सैन्य अभियान था जिसमें भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया। इसमें लगभग 100 आतंकियों को मार गिराया गया। यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें एक नेपाली नागरिक भी शामिल था।