नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा। इसकी घोषणा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को की। संसद का यह सत्र करीब तीन महीने के अंतराल के बाद शुरू होगा और दोनों सदनों की बैठकें सुबह 11 बजे से होंगी।
“ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पहला सत्र होगा
यह सत्र देश के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद का पहला संसद सत्र होगा। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इस हमले और उसके बाद के हालात को लेकर विपक्षी पार्टियां विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रही थीं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा कि विपक्ष की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाने की तत्काल और सामूहिक मांग की गई थी। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी सहित कई विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर वाले पत्र का भी ज़िक्र किया।
खड़गे का केंद्र सरकार पर आरोप
खड़गे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह भारत के नागरिकों और उनके चुने हुए नेताओं को अंधेरे में रख रही है। उन्होंने कहा कि पहलगाम के हमले के साथ-साथ पुंछ, उरी और राजौरी में हुई नागरिकों की हत्याएं, युद्धविराम की घोषणाएं, और राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति पर असर डालने वाले मुद्दे हैं, जिन पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने विदेशी मीडिया और देशों को जानकारी दी है, लेकिन संसद को अब तक पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया है।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी
इस सत्र के दौरान एक और अहम मुद्दा हो सकता है, दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्री किरेन रिजिजू ने इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत शुरू कर दी है। न्यायमूर्ति वर्मा के आवास में एक स्टोररूम से “जली हुई नकदी” मिलने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने एक आंतरिक जांच समिति बनाई थी। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना है।
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